पेंशन भुगतान में देरी और अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करने पर शासन की कार्रवाई, शिक्षा सचिव को भी कोर्ट ने किया था तलब

बिलासपुर। फैमिली पेंशन के भुगतान में देरी और हाई कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करना मुंगेली के पूर्व प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) एलपी डाहिरे को भारी पड़ गया। राज्य शासन ने प्रशासनिक लापरवाही और न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं करने के मामले में उन्हें निलंबित कर दिया है। डाहिरे वर्तमान में बिलासपुर स्थित संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय में सहायक संचालक के पद पर पदस्थ थे।

यह मामला राजेश्वरी त्रिपाठी की ओर से फैमिली पेंशन के भुगतान में अत्यधिक देरी को लेकर हाई कोर्ट में दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में पेंशन प्रकरण के निराकरण में विभागीय सुस्ती और प्रशासनिक लापरवाही का मुद्दा उठाया गया था। इस मामले में हाई कोर्ट ने कई बार विभाग को निर्देश दिए और समय पर जवाब प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन तत्कालीन प्रभारी डीईओ एलपी डाहिरे की ओर से निर्धारित निर्देशों का पालन नहीं किया गया। विभागीय लापरवाही पर हाई कोर्ट ने शिक्षा सचिव को भी तलब किया था। बताया जा रहा है कि इस मामले में सचिव की नाराजगी के बाद शासन ने निलंबन की कार्रवाई की।

शासन के आदेश में डाहिरे के कृत्य को हाई कोर्ट के आदेशों का अनादर, प्रशासनिक अनुशासनहीनता और पदीय कर्तव्यों के प्रति गंभीर उदासीनता माना गया है। इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9 (1) (ए) के तहत कदाचार और कर्तव्यहीनता की श्रेणी में रखा गया है।

दो महीने पहले मुंगेली से बिलासपुर भेजे गए थे

करीब दो महीने पहले हुए प्रशासनिक फेरबदल में एलपी डाहिरे को मुंगेली से बिलासपुर स्थित संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय में सहायक संचालक के पद पर भेजा गया था। मुंगेली में वे प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बिलासपुर निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। हाई कोर्ट के आदेशों की अवहेलना से जुड़े इस मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारी पर हुई कार्रवाई को प्रशासनिक हलकों में गंभीरता से देखा जा रहा है।