दिल्ली में अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन के राष्ट्रीय मंच पर होंगे सम्मानित,,,


सामाजिक सरोकारों में उल्लेखनीय योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर होगी पहचान,,


राजधानी रिपोर्टर/सौरभ साहू कि विशेष रिपोर्ट,,

दिनांक,03/11/2026

लोकेशन, सूरजपुर छत्तीसगढ़ ‌।


सूरजपुर। सामाजिक सेवा, मानव कल्याण और जनहित के कार्यों के प्रति समर्पण जब किसी व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य बन जाता है, तो उसकी पहचान केवल उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। सूरजपुर के डॉ. राहुल अग्रवाल टिंकू ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन, व्यावसायिक उपलब्धियों और निरंतर जनसेवा के माध्यम से ऐसी ही एक विशिष्ट पहचान बनाई है। उनके इसी सामाजिक योगदान और समर्पण को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने जा रहा है।

अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन द्वारा डॉ. राहुल अग्रवाल को महाराजा अग्रसेन ग्लोबल आइकॉन अवार्ड-2026 से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। संगठन के राष्ट्रीय चेयरमैन प्रदीप मित्तल द्वारा 31 अक्टूबर 2026 को जारी सम्मान पत्र के माध्यम से इसकी औपचारिक सूचना दी गई है। यह सम्मान 14 नवंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित अंबेडकर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, जनपथ में आयोजित समारोह में प्रदान किया जाएगा। इस राष्ट्रीय आयोजन में देशभर से अग्रवाल समाज के प्रतिनिधियों एवं विशिष्ट व्यक्तित्वों की उपस्थिति रहेगी। सूरजपुर के लिए यह गौरव का विषय है कि यहां से जुड़ी एक शख्सियत को राष्ट्रीय मंच पर समाजसेवा के लिए सम्मानित किया जाएगा। डॉ. राहुल अग्रवाल को मिलने वाला यह सम्मान केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि समाजसेवा के प्रति समर्पित सोच और मानवीय मूल्यों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि शारीरिक चुनौतियां किसी व्यक्ति की इच्छाशक्ति, कर्मठता और समाज के लिए कुछ करने के संकल्प को कमजोर नहीं कर सकतीं। जहाँ संघर्ष ने उन्हें मजबूत बनाया, व्यावसायिक सफलता ने उन्हें सक्षम बनाया और सेवा भावना ने उन्हें समाज से जोड़े रखा। अब अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन के राष्ट्रीय मंच पर मिलने जा रहा महाराजा अग्रसेन ग्लोबल आइकॉन अवार्ड उनके इसी समर्पण का सम्मान होगा। इस उपलब्धि से सूरजपुर सहित पूरे सरगुजा संभाग में हर्ष और गौरव का वातावरण है।

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 _हादसे ने बदली जिंदगी, लेकिन हौसले नहीं हुए कमजोर_ 


डॉ. राहुल अग्रवाल टिंकू की जीवन यात्रा संघर्ष, आत्मविश्वास और अदम्य इच्छाशक्ति की मिसाल है। एक सड़क दुर्घटना के कारण उन्हें स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का सामना करना पड़ा। यह उनके जीवन का बेहद चुनौतीपूर्ण दौर था, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय अपने आत्मबल को मजबूत किया। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने न केवल स्वयं को आत्मनिर्भर बनाए रखा, बल्कि व्यावसायिक और सामाजिक क्षेत्र में भी अपनी सक्रियता कायम रखी। यही संघर्ष आज उनके व्यक्तित्व को और अधिक प्रेरणादायी बनाता है।


 व्यावसायिक सफलता के साथ समाजसेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य 


व्यावसायिक क्षेत्र में उन्होंने बर्बरीक प्रोजेक्ट लिमिटेड में वाइस प्रेसिडेंट के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कंपनी रेल, सड़क, खनन और आधारभूत संरचना विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्यरत है। व्यावसायिक दायित्वों के साथ-साथ उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, धार्मिक गतिविधियों, खेल और जरूरतमंदों की सहायता को भी अपने सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया है। उनके सेवा कार्यों में साधुराम विद्या मंदिर का संचालन, एसआरपीआर मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साधुराम सेवा कुंज तथा नर्सिंग कॉलेज के संचालन से जुड़ी पहलें शामिल हैं। इन संस्थानों के माध्यम से शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में समाज को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

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 दिव्यांगजनों की सेवा से लेकर निर्धन कन्याओं के विवाह तक विस्तृत सेवा का दायरा 


डॉ. राहुल अग्रवाल की सेवा भावना का एक महत्वपूर्ण पक्ष दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशीलता है। उनके द्वारा वर्षभर दिव्यांगजनों की सहायता एवं सेवा के कार्य किए जाते हैं। इसके साथ ही खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और सहयोग, निर्धन कन्याओं के विवाह में सहायता तथा आश्रयविहीन लोगों को आवास निर्माण में सहयोग जैसी गतिविधियां भी उनके सामाजिक सरोकारों को दर्शाती हैं। धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में देवगढ़ धाम में भंडारा, मां बागेश्वरी मंदिर निर्माण तथा कुदरगढ़ धाम में नौ दिवसीय सेवा भंडारे के आयोजन में उनका योगदान उल्लेखनीय है। वहीं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी वे सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।