वाहनों की संख्या लगातार बढ़ी, लेकिन सड़कें और पार्किंग व्यवस्था नहीं बदली; वन-वे और डायवर्जन से कुछ देर की राहत, स्थायी समाधान अब भी दूर
बिलासपुर में त्योहारों का मौसम आते ही बाजारों और प्रमुख सड़कों पर जाम की समस्या फिर गंभीर हो जाती है। दिवाली हो या कोई बड़ा आयोजन, हर बार ट्रैफिक पुलिस वन-वे और डायवर्जन का सहारा लेकर यातायात संभालने की कोशिश करती है। कुछ समय के लिए इसका असर दिखता है, लेकिन वाहनों की बढ़ती संख्या और सीमित सड़क क्षमता के बीच यह व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं बन पा रही। नतीजा यह है कि बाजार में जाम कम करने के प्रयास में आसपास की सड़कें भी वाहनों के दबाव से भर जाती हैं और आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।
शहर में बीते कुछ वर्षों में दोपहिया, चारपहिया, ऑटो और ई-रिक्शा की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन बाजार की सड़कों की चौड़ाई लगभग पहले जैसी ही है। पार्किंग के लिए भी पर्याप्त जगह विकसित नहीं हो पाई है। ऐसे में त्योहारों के दौरान बाजार पहुंचने वाले ग्राहकों और व्यापारियों के वाहनों का दबाव संभालना चुनौती बन जाता है। इस बार भी ट्रैफिक पुलिस ने पीक आवर्स में वन-वे लागू करने और जरूरत के मुताबिक वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से निकालने की योजना बनाई है। लेकिन जिन सड़कों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया जाएगा, वे पहले से संकरी हैं। कई जगह सड़क किनारे वाहन खड़े रहते हैं और उनकी हालत भी ठीक नहीं है। ऐसे में बाजार का अतिरिक्त ट्रैफिक इन रास्तों पर पहुंचा तो जाम की समस्या वहां भी खड़ी हो सकती है।
पिछले साल भी गोल बाजार और सदर बाजार में वन-वे तथा डायवर्जन लागू किया गया था, लेकिन इसके बावजूद मुख्य बाजार के साथ आसपास की सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रही। इस बार भी व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा। कोतवाली टीआई तोप सिंह नवरंग ने व्यापारियों के साथ बैठक कर सड़क पर सामान नहीं रखने की अपील की है, लेकिन केवल दुकानों के बाहर सामान हटाने से वाहनों की बढ़ती संख्या और पार्किंग की समस्या का समाधान नहीं होगा।
पार्किंग स्थलों को लेकर भी तस्वीर बहुत अलग नहीं है। पिछले साल देवकीनंदन स्कूल, लालबहादुर स्कूल, पुराना बस स्टैंड और रिवर व्यू सहित अन्य स्थानों पर पार्किंग बनाई गई थी। इस बार भी इन्हीं जगहों का इस्तेमाल किया जाना है। हालांकि इन पार्किंग स्थलों पर खड़े वाहनों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम रहेंगे, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पार्किंग से बाजार तक लोगों को पहुंचाने के लिए सुविधाजनक व्यवस्था नहीं होने पर ग्राहक फिर अपने वाहन लेकर बाजार की ओर बढ़ सकते हैं।
शहर में 20 हजार से अधिक ई-रिक्शा और ऑटो के संचालन को लेकर भी कोई व्यापक व्यवस्था सामने नहीं आई है। ई-रिक्शा चालकों का कोई संगठित संघ नहीं है और ऑटो संघ को भी ट्रैफिक पुलिस की ओर से अब तक स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। फुटकर दुकानदारों और ठेले वालों के लिए भी अलग स्थान तय करने की ठोस योजना नहीं दिख रही। जबकि बाजार की सड़कों पर इनकी मौजूदगी भी यातायात प्रभावित करती है। ट्रैफिक का दबाव बढ़ने पर पीक आवर्स में वन-वे लागू करने और अतिरिक्त वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से निकालने की बात एएसपी ट्रैफिक राम गोपाल करियारे ने कही है।
शहर में त्योहारों के दौरान जाम की समस्या केवल बाजार तक सीमित नहीं रहती। हाल ही में इंदिरा सेतु पर पेट्रोल टैंकर खराब होने से करीब 3 घंटे तक दोनों ओर वाहनों की कतार लगी रही। पुलिस ने महामाया और नेहरू चौक की टीम भेजकर यातायात डायवर्ट कराया, लेकिन रामसेतु और रिवर व्यू रोड सहित आसपास के रास्तों पर भी दबाव बढ़ गया। इसी तरह राज्योत्सव के दौरान अतिथियों के आगमन से पहले अंबेडकर चौक और सत्यम चौक का रास्ता बंद किया गया तो जेल रोड, फूल बाजार, ईदगाह रोड, इमलीपारा और खपरगंज-मध्यनगरी रोड तक वाहनों की भीड़ पहुंच गई। इससे साफ है कि शहर के एक हिस्से में रास्ता बंद या डायवर्ट करने का असर कई दूसरे इलाकों पर पड़ता है।
बिलासपुर में जाम अब किसी एक दिन या एक बाजार की समस्या नहीं रह गई है। त्योहारों, आयोजनों और सामान्य दिनों में भी प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद यातायात प्रबंधन अब भी वन-वे, डायवर्जन और अस्थायी पार्किंग तक सीमित है। जरूरत बाजार क्षेत्रों में स्थायी पार्किंग, ई-रिक्शा और मालवाहक वाहनों के लिए समय-सीमा, ठेले-फुटकर दुकानदारों के लिए निर्धारित स्थल और वैकल्पिक मार्गों को व्यवस्थित करने की है। जब तक सड़क, पार्किंग और वाहनों के संचालन को लेकर एकीकृत दीर्घकालीन योजना नहीं बनेगी, तब तक हर त्योहार पर जाम से राहत के लिए वही पुराने इंतजाम दोहराए जाते रहेंगे।