बिलासपुर। शहर के तेलीपारा में इस बार दुर्गोत्सव का आकर्षण कुछ खास है। श्री शहीद चंद्रशेखर आजाद दुर्गोत्सव समिति अपनी स्थापना के 50वें वर्ष यानी स्वर्ण जयंती को यादगार बनाने के लिए करीब 1.50 करोड़ रुपए की लागत से भव्य दुर्गा पंडाल तैयार कर रही है। श्रीलंका के प्रसिद्ध भद्रकाली अम्मन मंदिर की तर्ज पर बनाए गए इस पंडाल में दक्षिण भारतीय मंदिर स्थापत्य की झलक देखने को मिल रही है। भव्य प्रवेश द्वार, आकर्षक सजावट, रंग-बिरंगी रोशनी और धार्मिक झांकियां श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं। मां दुर्गा के दर्शन के साथ यहां नवरात्रि उत्सव मेले का भी आयोजन किया जा रहा है।

समिति के लिए यह वर्ष इसलिए भी खास है, क्योंकि दुर्गोत्सव के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजन को विशेष स्वरूप दिया गया है। पंडाल निर्माण के लिए कोलकाता के कारीगरों की मदद ली गई है। निर्माण कार्य करीब दो महीने पहले शुरू किया गया था। मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा चांपा में तैयार की गई है, जबकि प्रतिमा के विशेष आभूषण कोलकाता से मंगाए गए हैं।

80-80 फीट ऊंचे प्रवेश द्वार, गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमाएं

पंडाल की खासियत इसके विशाल प्रवेश द्वार हैं। दोनों ओर करीब 80-80 फीट ऊंचे प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। दक्षिण भारतीय मंदिरों की शैली में तैयार इन द्वारों पर भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की करीब 20-20 फीट ऊंची प्रतिमाएं द्वारपाल के रूप में सजाई गई हैं। मंदिर की वास्तुकला से प्रेरित यह सजावट श्रद्धालुओं को श्रीलंका और दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिरों की याद दिलाती है।

पंडाल तक पहुंचने वाले मार्ग को भी आकर्षक बनाने के लिए विशेष रोशनी की व्यवस्था की गई है। कोलकाता के चंदननगर की तर्ज पर की गई लाइटिंग से रात के समय पूरा क्षेत्र जगमगाता है। रोशनी और सजावट के कारण तेलीपारा का यह इलाका दुर्गोत्सव के दौरान लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

धार्मिक झांकियां और मनोरंजन के विशेष इंतजाम

इस बार आयोजन को केवल पूजा और दर्शन तक सीमित नहीं रखा गया है। श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक झांकियों की व्यवस्था की गई है। इनमें बिलासा देवी की प्रतिमा, शिव-पार्वती की झांकी, राधा-कृष्ण का रथ और रावण वध की प्रस्तुति जैसे आकर्षण शामिल हैं। इसके अलावा विशेष लाइटिंग वाली झांकियां और बाहर से बुलाए गए कलाकारों की प्रस्तुतियां भी आयोजन को भव्य बना रही हैं।

नवरात्रि उत्सव मेले में बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले और अन्य आकर्षण रखे गए हैं। खाने-पीने की दुकानों के कारण परिवार के साथ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर धार्मिक आयोजन और मेले का आनंद मिल रहा है। समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पार्किंग की व्यवस्था भी की है।

रोज भंडारा और सांस्कृतिक कार्यक्रम

नवरात्रि के दौरान पंडाल में प्रतिदिन भंडारे और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मां दुर्गा की आराधना, धार्मिक प्रस्तुतियों और उत्सवी माहौल के बीच श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। स्वर्ण जयंती वर्ष होने के कारण समिति ने इस बार आयोजन को पहले से अधिक भव्य स्वरूप दिया है।

समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, पांच दशक की धार्मिक और सामाजिक परंपरा को यादगार बनाने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को मां दुर्गा के दर्शन के साथ भारतीय संस्कृति, मंदिर स्थापत्य और धार्मिक परंपराओं की भव्यता का अनुभव भी मिले। करीब 1.50 करोड़ रुपए के बजट वाला यह आयोजन तेलीपारा के दुर्गोत्सव को इस वर्ष शहर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल कर रहा है।