दिसंबर में खत्म होगी कंपनी की ठेका अवधि, जनवरी से नए टेंडर की तैयारी; पार्षदों ने कहा- दोबारा नहीं मिले काम, कर्मचारियों की तैनाती और सफाई की गुणवत्ता की हो जांच
बिलासपुर। शहर की सफाई व्यवस्था पर नगर निगम हर महीने करीब 6.60 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। इसमें अकेले 4 करोड़ रुपये दिल्ली लायंस कंपनी को दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद शहर के विभिन्न वार्डों में गंदगी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। पूरे शहर की सफाई का जिम्मा संभाल रही कंपनी के कामकाज से 25 पार्षद असंतुष्ट हैं। पार्षदों का आरोप है कि वार्डों की जरूरत के मुताबिक सफाईकर्मी तैनात नहीं किए जा रहे हैं। बड़े वार्डों में भी कर्मचारियों की कमी के कारण नियमित सफाई प्रभावित हो रही है। इसी नाराजगी के बीच पार्षदों ने मांग की है कि दिसंबर में ठेका अवधि समाप्त होने के बाद कंपनी को दोबारा काम नहीं दिया जाए।
दिल्ली लायंस की ठेका अवधि दिसंबर में पूरी हो रही है। इसके बाद नगर निगम को सफाई व्यवस्था के लिए नई निविदा प्रक्रिया शुरू करनी है। ऐसे में नए ठेके से पहले ही कंपनी के कामकाज और सफाई व्यवस्था की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। पार्षदों का कहना है कि नए टेंडर में केवल सबसे कम दर को आधार बनाकर कंपनी का चयन नहीं किया जाना चाहिए। यह भी देखा जाना चाहिए कि संबंधित कंपनी वास्तव में कितने कर्मचारी तैनात करती है, वार्डों में सफाई की स्थिति कैसी है और निर्धारित शर्तों का कितना पालन किया जा रहा है।
1,565 सफाईकर्मी निर्धारित, फिर भी वार्डों में कर्मचारियों की कमी का आरोप
नगर निगम में शामिल 18 नए वार्डों में 1 जनवरी 2025 से दिल्ली लायंस ने सफाई का काम शुरू किया था। इनमें 15 ग्राम पंचायतों के क्षेत्र, दो नगर पंचायत और एक नगर पालिका क्षेत्र शामिल थे। इन नए क्षेत्रों के लिए 790 सफाईकर्मी निर्धारित किए गए थे, जबकि पुराने क्षेत्रों के लिए 775 कर्मचारियों की व्यवस्था बताई गई थी। इस तरह पूरे शहर में कुल 1,565 सफाईकर्मियों की तैनाती निर्धारित थी।
इसके बावजूद पार्षदों का कहना है कि जमीनी स्तर पर कर्मचारियों की संख्या और निर्धारित व्यवस्था में अंतर है। कई वार्डों में पर्याप्त सफाईकर्मी नहीं पहुंचने से नियमित सफाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में निगम को यह जांचना चाहिए कि ठेका शर्तों के अनुसार कितने कर्मचारी तैनात किए गए हैं और उनके आधार पर भुगतान की प्रक्रिया किस तरह संचालित हो रही है।
सामान्य सभा में उठा था कम कर्मचारियों की तैनाती का मुद्दा
नगर निगम की सामान्य सभा में भाजपा पार्षद जय वाधवानी ने भी सफाईकर्मियों की तैनाती को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके वार्ड में केवल सात कर्मचारी काम करने पहुंचते हैं, जबकि भुगतान 15 कर्मचारियों के हिसाब से किया जाता है। उन्होंने दूसरे वार्डों में भी इसी तरह की स्थिति होने की आशंका जताते हुए जांच की जरूरत बताई थी।
हालांकि, कर्मचारियों की वास्तविक तैनाती और भुगतान में अंतर के इन आरोपों की पुष्टि के लिए उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी चार्ट, निरीक्षण रिपोर्ट और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच जरूरी है। यदि निर्धारित संख्या से कम कर्मचारी तैनात किए जा रहे हैं, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना भी आवश्यक होगा।
नए टेंडर में गुणवत्ता और जवाबदेही पर जोर
दिसंबर में मौजूदा ठेका समाप्त होने के बाद नगर निगम नई निविदा जारी करने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में सफाई व्यवस्था से असंतुष्ट पार्षदों की मांग है कि नए ठेके में केवल वित्तीय दरों के बजाय काम की गुणवत्ता, कर्मचारियों की उपलब्धता, वार्डों की जरूरत और निगरानी की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि शहर की सफाई के लिए हर महीने करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि वार्डों में गंदगी बनी रहती है, तो ठेका व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है।
नगर निगम के एचओ प्रवेश कश्यप ने बताया कि ठेका अवधि समाप्त होने के बाद नया टेंडर जारी किया जाएगा। निविदा प्रक्रिया में जो भी पात्र होगा, उसे नियमानुसार वर्क ऑर्डर दिया जाएगा। अब देखना होगा कि नई निविदा में निगम सफाई व्यवस्था को लेकर उठ रही शिकायतों और पार्षदों की आपत्तियों को किस तरह शामिल करता है।