युवाओं को खेल सुविधाओं से जोड़ने और नशे के आदी लोगों के उपचार-पुनर्वास पर रहेगा फोकस, 7 दिन में नोडल अधिकारी नियुक्त कर मांगी सूची

बिलासपुर। युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और स्कूल-कॉलेजों के आसपास नशीले पदार्थों की उपलब्धता रोकने के लिए शासन ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत शिक्षण संस्थानों को ड्रग-फ्री परिसर बनाने के साथ उनके 500 मीटर के दायरे में ड्रग-फ्री जोन विकसित करने पर जोर दिया गया है। अभियान में केवल नशीले पदार्थों की बिक्री रोकने तक सीमित रहने के बजाय युवाओं को खेल गतिविधियों से जोड़ने, जागरूकता बढ़ाने और नशे के आदी लोगों को उपचार व पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में 26 जून 2026 को हुई नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनकॉर्ड) समिति की 10वीं बैठक में दिए गए निर्देशों के पालन के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों को पत्र जारी किया है। निकायों को अभियान के संचालन और संबंधित गतिविधियों के लिए जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं।

जागरूकता के साथ खेल गतिविधियों पर जोर

योजना का उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सकारात्मक विकल्प उपलब्ध कराना भी है। इसके तहत स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने, खेल सुविधाओं का विकास करने और सामाजिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। संतों, युवाओं और मातृशक्ति को भी जागरूकता अभियान से जोड़ने की पहल की जाएगी।

इसके साथ नशे के आदी लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए उन्हें उपचार और पुनर्वास सेवाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था पर ध्यान दिया जाएगा। यानी अभियान में नशे की रोकथाम के साथ उसकी गिरफ्त में आ चुके लोगों को सामान्य जीवन में लौटने में मदद देने की कोशिश भी शामिल है।

7 दिन में नोडल अधिकारियों की जानकारी देनी होगी

नगरीय प्रशासन संचालनालय ने सभी नगरीय निकायों से नोडल और सहायक नोडल अधिकारियों के नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर मांगे हैं। क्षेत्रीय संयुक्त संचालकों को 7 दिन के भीतर अधीनस्थ निकायों से जानकारी एकत्र कर एकजाई प्रतिवेदन भेजना होगा। इससे अभियान के संचालन, निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।

डेढ़ साल में 1145 चालान, 79,550 रुपए जुर्माना

स्कूल-कॉलेजों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए औषधि प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई के आंकड़े भी सामने आए हैं। अप्रैल 2025 से सितंबर 2026 तक कोटपा एक्ट के तहत 1145 चालान काटे गए और कुल 79,550 रुपए जुर्माना वसूला गया।

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच सर्वाधिक 719 चालान काटे गए। इस दौरान 48,210 रुपए जुर्माना दर्ज किया गया। वहीं, अप्रैल से जून 2026 के बीच 197 चालान काटकर 18,190 रुपए का जुर्माना वसूला गया।

अब निगरानी और क्रियान्वयन की होगी अहम भूमिका

स्कूल-कॉलेजों के 500 मीटर के दायरे में ड्रग-फ्री जोन विकसित करने की पहल से शिक्षण संस्थानों के आसपास नशीले पदार्थों की उपलब्धता रोकने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर नियमित निगरानी, प्रभावी कार्रवाई, जागरूकता कार्यक्रमों और उपचार-पुनर्वास की सुविधाओं की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। निकाय स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति इसी व्यवस्था को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाने की दिशा में पहला कदम है।