बिलासपुर। सिरगिट्टी क्षेत्र से पकड़े गए 23 संदिग्धों को पुलिस ने रायपुर स्थित डिटेंशन सेंटर भेज दिया है। पुलिस का दावा है कि प्रारंभिक जांच में इनमें करीब 99 प्रतिशत के बांग्लादेशी नागरिक होने की जानकारी सामने आई है। संदिग्धों के पास मिले दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि कुछ लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लंबे समय से भारत में रह रहे थे।

संदिग्धों के बांग्लादेश से होने की जानकारी सामने आने के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने मामले की जांच के लिए टास्क फोर्स गठित की थी। टीम पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद पहुंची और परगना, जंगीपुर, सागरपाड़ा, साहेबरामपुर, महदीपुर, हबीबपुर और बामनगोला समेत कई क्षेत्रों की पुलिस से संपर्क किया। स्थानीय थाना और चौकी प्रभारियों से संदिग्धों के संबंध में जानकारी जुटाई गई।

पुलिस के अनुसार मुर्शिदाबाद पुलिस ने भी 23 संदिग्धों में से करीब 99 प्रतिशत के बांग्लादेशी नागरिक होने की जानकारी दी है। हालांकि, संबंधित गांवों में पूछताछ और स्थानीय स्तर पर जांच के बाद इसकी विस्तृत पुष्टि की जानी है। मुर्शिदाबाद पुलिस से आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद बिलासपुर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।

भारतीय दस्तावेज मिलने से गहराया संदेह

जांच के दौरान संदिग्धों के पास भारतीय नागरिकता से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस के मुताबिक, कुछ संदिग्धों के पास वर्ष 2010 और 2011 में जारी आधार कार्ड मिले हैं। इसके अलावा पैन कार्ड समेत अन्य दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों की वास्तविकता की जांच की जा रही है।

जांच अधिकारियों को संदेह है कि सीमा से लगे क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर पैसे लेकर दस्तावेज तैयार कराने के बाद उनका इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने और काम करने के लिए किया जाता है। फिलहाल पुलिस दस्तावेजों के स्रोत और उनके आधार पर तैयार अन्य रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

बॉर्डर से जुड़े गांवों तक मिले लिंक

पुलिस की अब तक की जांच में संदिग्धों के तार भारत-बांग्लादेश सीमा से लगे पश्चिम बंगाल के गांवों से जुड़े मिले हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सीमा क्षेत्र में नदी, खेत और आबादी के बीच से गुजरने वाले कई हिस्सों में निगरानी और आवाजाही चुनौतीपूर्ण रहती है। पुलिस इसी नेटवर्क और संदिग्धों के भारत आने के रास्तों की भी जानकारी जुटा रही है।

पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक पूछताछ में कुछ संदिग्धों के पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के बहाने भारत आने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उनके भारत में प्रवेश और दस्तावेज तैयार कराने की पूरी प्रक्रिया की जांच अभी जारी है।

बाल कारोबार से लेकर मजदूरी तक काम

पुलिस को आशंका है कि बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में ऐसे और भी लोग हो सकते हैं, जिनकी नागरिकता और दस्तावेजों की जांच की जरूरत है। इसी वजह से जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

पुलिस के अनुसार, संदिग्ध या उनके संपर्क में रहने वाले लोग बाल के कारोबार, पुराने कपड़ों से दरी-कंबल बनाने, टेंट हाउस में पंडाल लगाने और कबाड़ या घरेलू सामान से जुड़े कामों में शामिल पाए गए हैं। आसपास के कुछ उद्योगों में मजदूरी करने की जानकारी भी सामने आई है।

जांच अधिकारियों का कहना है कि सस्ते मजदूर मिलने के कारण कुछ लोग इनके दस्तावेजों और पहचान संबंधी स्थिति की अनदेखी करते हैं। पुलिस अब ऐसे लोगों और संदिग्धों को काम देने वाले नेटवर्क की भी जानकारी जुटा रही है।

आधिकारिक पुष्टि के बाद होगी आगे की कार्रवाई

फिलहाल 23 संदिग्धों को रायपुर डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। पुलिस को मुर्शिदाबाद से आधिकारिक पुष्टि और दस्तावेजों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। नागरिकता की पुष्टि होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने लोग बांग्लादेशी नागरिक हैं और किन दस्तावेजों के आधार पर वे भारत में रह रहे थे।