साहित्यिक मंच स्पंदन द्वारा अध्यापक दिवस के उपलक्ष्य में विशेष साहित्यिक संध्या आभासीय माध्यम से आयोजित की गयी. सभा का आरम्भ दीक्षा चौबे दुर्ग (छत्तीसगढ़) द्वारा सरस्वती वंदना की मधुर प्रस्तुति से हुआ. तदोपरान्त कानपुर की डॉ. मधु प्रधान ने गुरु पर रचित दोहे गायन शैली में प्रस्तुत कर कार्यक्रम को शोभित किया. लंदन से कार्यक्रम में सम्मलित हुए श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ने अपनी रचना 'तुम्हें प्रणाम गुरूजी' द्वारा सभी को प्रभावित किया. दीक्षा चौबे ने अपनी कृति 'ज्ञान का दीप जलाते शिक्षक' के माध्यम से ज्ञान के प्रसार में शिक्षक के महत्व पर प्रकाश डाला. उज्जैन की प्रखर एवं प्रबुद्ध लेखिका श्रीमती फाल्गुनी रोहित बियाणी ने अपनी प्रस्तुति 'जो जीवन दर्शन को जाने वही सनातन है' में सनातन परंपरा एवं जीवन दर्शन के गहन सम्बन्ध को अभिव्यक्त किया. चेन्नई की मोनिका डागा की रचना 'शरणागत जो आये गुरु की' ने उपस्थित सभी जनों का ध्यान आकर्षित किया. लखनऊ की वैशाली रस्तोगी ने अपनी रचना में पूर्व उपराष्ट्रपति एवं राष्ट्रपति श्रीयुत डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की शिक्षा के क्षेत्र व सार्वजनिक जीवन में योगदान को कुशलतापूर्वक दर्शाया. रतलाम की वैदेही कोठारी ने अपनी लघुकथा तस्वीर में व्यक्ति के विकास में माँ की भूमिका को रेखांकित किया. इन्दौर की युवा साहित्यशिल्पी सुश्री दिव्या भट्ट 'स्वयं द्वारा प्रस्तुत गुरु पर दोहावली छंद ' व लखनऊ की ऋचा उपाध्याय की रचना 'हर घर गोकुल'भी अतिमनोहारी रहे. लखनऊ की मधु पाठक की कृति परिवर्तन भी सभा की विशेष पहचान रही. गुरुग्राम की प्रीति अग्रवाल ने अपनी रचना 'स्कूल के वो दिन' द्वारा अपने छात्र जीवन की मृदु स्मृतियों को चित्रित किया. स्पन्दन संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष उज्जैन के प्रशांत माहेश्वरी ने अपनी कविता 'गुरु' में छात्र जीवन, चरित्र एवं सम्पूर्ण निर्माण में गुरु की भूमिका को वर्णित किया, उन्होंने उपस्थित सभी जनों को छात्र-शिक्षक सम्बन्ध पर 1954 में प्रदर्शित अनुकरणीय फ़िल्म जागृति देखने का सुझाव भी दिया. अन्त में प्रीति अग्रवाल द्वारा आभार ज्ञापन के साथ आयोजन सहर्ष सम्पन्न हुआ.
शिक्षक दिवस के अवसर पर साहित्यिक मंच स्पंदन द्वारा वर्चुअल बैठक आयोजित
By S BHARAT NEWS
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