आरबीआई के जागरूकता सेमिनार में 100 से अधिक शिक्षक शामिल, 2025 में साइबर धोखाधड़ी के 24 लाख मामले सामने आने की दी जानकारी
बिलासपुर। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के पीछे लालच, डर और जागरूकता की कमी तीन प्रमुख कारण हैं। ठग इन्हीं का फायदा उठाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं और उनके बैंक खातों से रकम पार कर देते हैं। भारतीय स्टेट बैंक के सेवानिवृत्त सहायक महाप्रबंधक नरेंद्र माखीजा ने यह बात भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के वित्तीय समावेशन और विकास विभाग की ओर से होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट में आयोजित ग्राहक जागरूकता सेमिनार में कही। कार्यक्रम में 100 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं को बैंकिंग सुविधाओं, केवाईसी, डिजिटल वित्तीय साक्षरता और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ी जानकारी दी गई।
सेमिनार में आरबीआई के सहायक महाप्रबंधक सत्येंद्र कुमार राठौर और उनकी टीम ने बैंक ग्राहकों को उपलब्ध सुविधाओं तथा शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया समझाई। इस दौरान डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के लिए सतर्कता बरतने पर जोर दिया गया।
2021 में 2.21 लाख से बढ़कर 2025 में 24 लाख मामले
नरेंद्र माखीजा ने साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2021 में साइबर धोखाधड़ी के 2.21 लाख मामले सामने आए थे, जबकि वर्ष 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 24 लाख हो गई। इन मामलों में बैंक ग्राहकों को 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि ठग लोगों को कभी इनाम या अधिक मुनाफे का लालच देते हैं, तो कभी बैंक खाता बंद होने, केवाईसी अपडेट नहीं होने या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर जल्दबाजी में गलत कदम उठाने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसे में किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक संबंधी जानकारी साझा करना या संदिग्ध लिंक खोलना भारी पड़ सकता है।
शिकायत और लावारिस जमा राशि की जानकारी के पोर्टल बताए
कार्यक्रम में वित्तीय धोखाधड़ी के शिकार लोगों की सहायता के लिए उपलब्ध शिकायत व्यवस्था और ऑनलाइन पोर्टल की जानकारी भी दी गई। प्रतिभागियों को सचेत पोर्टल के माध्यम से संदिग्ध कंपनियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया समझाई गई। वहीं, उद्गम पोर्टल के बारे में बताया गया, जिसके जरिए 10 वर्ष या उससे अधिक समय से निष्क्रिय खातों में जमा लावारिस राशि का पता लगाया जा सकता है।
इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन और आरबीआई की शिकायत प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस) के माध्यम से बैंकिंग सेवाओं से संबंधित शिकायतें दर्ज कराने और उनके निराकरण की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों की सहायता के लिए भारत सरकार की ओर से शुरू किए गए एमआरएम और जीआरएम पोर्टल का भी उल्लेख किया गया।
डिजिटल लेनदेन में सतर्कता ही बचाव
आरबीआई की टीम ने बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में समय पर शिकायत करने की जरूरत बताई। ऐसे जागरूकता अभियान का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के प्रति जागरूक करना, बैंकिंग सेवाओं की जानकारी देना और वित्तीय धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान को कम करना है। आरबीआई की ओर से ग्राहकों को वित्तीय सुरक्षा और शिकायत निवारण की व्यवस्थाओं के प्रति जागरूक करने के लिए देशभर में समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।