20 दिन से काम बंद, 15 नवंबर से धान खरीदी की तैयारियों पर भी असर; काम पर नहीं लौटे तो सर्विस ब्रेक मानी जाएगी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ पटवारी संघ की हड़ताल 20वें दिन भी जारी है। अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर पटवारी काम पर लौटने को तैयार नहीं हैं। इधर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें 48 घंटे के भीतर काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया है। निर्धारित समय में काम शुरू नहीं करने पर उनकी सर्विस ब्रेक मानी जाएगी। पटवारियों और प्रशासन के बीच अब तक बातचीत नहीं होने से गतिरोध खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ पटवारी संघ 13 अक्टूबर से पदोन्नति में न्याय, वेतन विसंगति दूर करने और पीएवी एप बंद करने की मांग को लेकर हड़ताल पर है। संघ शासन को ज्ञापन सौंप चुका है, लेकिन अब तक मांगों पर सहमति नहीं बन पाई है। हड़ताल का असर राजस्व संबंधी कामकाज पर लगातार बढ़ रहा है। जमीन की खरीद-बिक्री के बाद नामांतरण, पैतृक संपत्ति का बंटवारा, सीमांकन और खसरा-बी-1 की प्रतियां प्राप्त करने जैसे काम अटके हुए हैं। गिरदावरी, फसल नुकसान का सर्वे और छात्रों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन पर भी असर पड़ रहा है।
धान खरीदी की तैयारियों पर भी असर
15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी के बीच पटवारियों की हड़ताल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। एग्रीस्टेक में पंजीयन की तारीख निकल चुकी है, वहीं धान खरीदी के लिए करीब 1700 खसरों का अप्रूवल किया जाना बाकी है। इनका अनुमोदन होने के बाद ही संबंधित किसान धान बेच सकेंगे। पटवारियों के काम पर नहीं लौटने से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। हड़ताल लंबी खिंची तो धान खरीदी की तैयारियों पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा किसानों को कृषि ऋण, फसल बीमा और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी परेशानी हो रही है।
48 घंटे में नहीं लौटे तो सर्विस ब्रेक
अपर कलेक्टर बीरेंद्र बी. पंचभाई ने बताया कि पटवारियों को 48 घंटे के भीतर काम पर लौटने का निर्देश दिया गया है। यदि वे निर्धारित समय में काम पर नहीं लौटते हैं तो उनकी सर्विस ब्रेक मानी जाएगी।