बिना सूचना नई व्यवस्था लागू करने का आरोप, पुराने नक्शों से भी आ रही दिक्कत; नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे के काम अटकने की आशंका
बिलासपुर। फसल गिरदावरी के लिए पीवी एप लागू करने के विरोध में जिले के पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। पटवारी संघ का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना के नई व्यवस्था लागू कर दी गई, जबकि एप में तकनीकी और प्रक्रियागत विसंगतियां भी हैं। हड़ताल के पहले दिन तहसील कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हुआ। आंदोलन लंबा खिंचने पर नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और प्रमाणपत्रों से जुड़े काम अटक सकते हैं। वहीं, धान खरीदी की तैयारियों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
पटवारी संघ के अनुसार, पहले पटवारी आईडी के माध्यम से ऑनलाइन फसल एंट्री की जा रही थी। इस व्यवस्था को बंद कर 18 सितंबर 2026 से पीवी एप के जरिए फसल गिरदावरी करने के निर्देश दिए गए। संघ का कहना है कि नई व्यवस्था लागू करने से पहले पटवारियों को पर्याप्त जानकारी और तैयारी का अवसर नहीं दिया गया। अब एप के जरिए भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया में भी कई तरह की दिक्कतें सामने आ रही हैं।
1.10 लाख खसरों का सत्यापन बाकी
प्रशासन के अनुसार, जिले में करीब 8.64 लाख खसरों का डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरा हो चुका है, जबकि 1.10 लाख खसरों का भौतिक सत्यापन बाकी है। इस प्रक्रिया में पटवारियों को खेतों में जाकर प्रत्येक खसरे के चारों कोनों की फोटो खींचकर पीवी एप पर अपलोड करनी है।
पटवारी संघ का कहना है कि खरीफ गिरदावरी वर्ष 2026-27 के लिए शासन ने 17 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक डिजिटल क्रॉप सर्वे और ऑनलाइन फसल एंट्री की समयसीमा तय की थी। पटवारी निर्धारित अवधि में गिरदावरी का काम कर रहे थे, लेकिन बीच में नई व्यवस्था लागू होने से परेशानी बढ़ गई।
तीन साल पुराने नक्शों से सर्वे में दिक्कत
पटवारी संघ ने डिजिटल क्रॉप सर्वे में तीन साल पुराने नक्शों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। संघ के मुताबिक, कई स्थानों पर जमीन का बंटवारा हो चुका है, लेकिन नए नक्शे सर्वे में शामिल नहीं हो पाए हैं। ऐसी स्थिति में मौके पर मौजूद जमीन और रिकॉर्ड में दर्ज नक्शे के बीच अंतर आ रहा है।
संघ ने शासन को दिए ज्ञापन में कहा है कि जिन खसरों के नक्शे अब तक विभाजित नहीं हुए हैं, उन्हें मौके पर जाकर किसान की सहमति के बिना चिन्हित करने की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पटवारियों का कहना है कि इन तकनीकी और प्रक्रियागत विसंगतियों को दूर किए बिना सत्यापन का काम करना मुश्किल होगा।
नामांतरण, सीमांकन और प्रमाणपत्रों के काम होंगे प्रभावित
पटवारियों की हड़ताल से आम लोगों के राजस्व संबंधी काम प्रभावित होने की आशंका है। इसमें डायवर्सन प्रतिवेदन, सीमांकन, पटवारी प्रतिवेदन, आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र, डीएससी, नामांतरण और जमीन के बंटवारे से जुड़े प्रकरण शामिल हैं। हड़ताल जारी रहने पर इन कामों के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ सकता है।
इधर, तहसीलदारों के तबादलों के कारण पुराने अधिकारियों के कार्यमुक्त होने और नए अधिकारियों के प्रभार संभालने की प्रक्रिया भी चल रही है। ऐसे में जिले के राजस्व न्यायालयों में पहले दिन केवल 42 मामलों की सुनवाई हुई।
शासन स्तर पर होगा निर्णय
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल पूरे राज्य में चल रही है। इस संबंध में निर्णय शासन स्तर पर लिया जाना है।