तीन दिन तक जिंदगी और मौत से जूझती रही बच्ची, इकलौती बेटी की मौत से सदमे में मां ने अस्पताल में तोड़ी मूर्ति


बिलासपुर। पढ़ाई के लिए मां की समझाइश से नाराज 12 साल की बच्ची ने आवेश में आकर कीटनाशक पी लिया। तीन दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद बुधवार को सिम्स में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इकलौती बेटी को खोने के सदमे में मां की हालत भी बिगड़ गई। अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष के बाहर रखी भगवान की मूर्ति तोड़ने से कुछ देर के लिए परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई।


घटना रतनपुर क्षेत्र के ग्राम गरवट की है। यहां रहने वाले दीपक चंद्राकर की 12 वर्षीय बेटी रतिका को तीन दिन पहले उसकी मां प्रीति चंद्राकर ने पढ़ाई पर ध्यान देने और नियमित रूप से पढ़ने बैठने की समझाइश दी थी। मां की बात अनसुनी करने पर उन्होंने दोबारा उसे पढ़ाई के लिए कहा। इसी बात से नाराज होकर बच्ची ने आवेश में कीटनाशक पी लिया।


बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे तत्काल निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां उपचार के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद बुधवार को उसे सिम्स में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।


बेटी की मौत से मां सदमे में


इकलौती बेटी की मौत की खबर से मां प्रीति चंद्राकर गहरे सदमे में आ गईं। अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष के बाहर रखी भगवान की मूर्ति को उन्होंने तोड़ दिया। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी और हंगामे की स्थिति बन गई। घटना ने परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है।