जिला उपभोक्ता आयोग ने माना सेवा में कमी, बिलासपुर के युवक की शिकायत पर फैसला; 5 हजार रुपए पर 9% सालाना ब्याज भी देना होगा

बिलासपुर। रेलवे से पार्सल बुक कराने के बाद सामान गंतव्य तक नहीं पहुंचने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने रेलवे को सेवा में कमी का दोषी माना है। आयोग ने बिलासपुर निवासी युवक की शिकायत स्वीकार करते हुए रेलवे को तीन पार्सल का मूल्य, मानसिक परेशानी और वाद खर्च सहित कुल 30 हजार रुपए देने का आदेश दिया है। साथ ही 5 हजार रुपए पर शिकायत प्रस्तुत करने की तारीख से भुगतान तक 9% सालाना की दर से साधारण ब्याज भी देना होगा। रेलवे को आदेश के पालन के लिए 45 दिन का समय दिया गया है।

जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल, सदस्य पूर्णिमा सिंह और सदस्य आलोक कुमार पांडेय की पीठ ने यह फैसला सुनाया। सकरी स्थित रामा लाइफ सिटी निवासी मलय श्रीवास्तव ने शिकायत में बताया कि उनके कर्मचारी हरीश कुमार ने 29 जून 2024 को नई दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से बिलासपुर के लिए तीन बड़े सूटकेस पार्सल के रूप में बुक कराए थे। रेलवे के रिकॉर्ड के अनुसार, पार्सल 2 जुलाई 2024 को ट्रेन नंबर 12824 संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में लोड किए गए थे।

सामान बिलासपुर नहीं पहुंचने पर श्रीवास्तव ने 7 जुलाई 2024 को रेलवे स्टेशन के पार्सल कार्यालय में जानकारी ली। वहां उन्हें बताया गया कि सामान अभी नहीं आया है और पहुंचने पर सूचना दी जाएगी। इसके बाद उन्होंने रेलवे के शिकायत नंबर 139 पर भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पार्सल नहीं मिले और न ही समस्या का समाधान हुआ। अंततः उन्होंने रेलवे को कानूनी नोटिस भेजने के बाद उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

रेलवे की दलीलें आयोग ने नहीं मानीं

सुनवाई के दौरान रेलवे ने दलील दी कि पार्सल की बुकिंग शिकायतकर्ता ने स्वयं नहीं कराई थी, बल्कि उनके कर्मचारी ने कराई थी। रेलवे ने यह भी कहा कि बुकिंग के समय सामान का घोषित मूल्य 5 हजार रुपए था, जबकि शिकायतकर्ता ने 30 हजार रुपए की मांग की। इसके अलावा मामले की सुनवाई के अधिकार पर भी सवाल उठाए गए।

आयोग ने इन आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया। उसने स्पष्ट किया कि पार्सल की बुकिंग कर्मचारी द्वारा कराए जाने से शिकायतकर्ता उपभोक्ता की श्रेणी से बाहर नहीं हो जाता।

सामान पहुंचाने का प्रमाण नहीं दे सका रेलवे

आयोग ने दस्तावेजों की जांच में पाया कि रेलवे के रिकॉर्ड से तीनों पार्सल ट्रेन में लोड होने की पुष्टि होती है, लेकिन उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने का प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। आयोग ने इसे सेवा में कमी माना।

आदेश के अनुसार, रेलवे को पार्सल का मूल्य 5 हजार रुपए, मानसिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपए और वाद खर्च के रूप में 5 हजार रुपए देने होंगे। इसके अतिरिक्त 25 सितंबर 2024 को शिकायत प्रस्तुत करने की तारीख से भुगतान तक 5 हजार रुपए पर 9% वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।