विकास भवन समेत 5 जगहों की बिजली सप्लाई बंद, करीब 150 स्ट्रीट लाइटें बंद; 397 कनेक्शनों की बिलिंग में गड़बड़ी के बाद 57 करोड़ घटे, फिर भी करोड़ों की देनदारी

बिलासपुर। नगर निगम पर बिजली बिल का करीब 280 करोड़ रुपये बकाया होने का असर अब शहर की सड़कों और सरकारी कार्यालयों की बिजली व्यवस्था पर दिखने लगा है। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) ने बकाया भुगतान नहीं होने पर विकास भवन समेत पांच जगहों के बिजली कनेक्शन काट दिए हैं। वहीं, स्ट्रीट लाइट के कनेक्शन कटने से शहर की कई सड़कों पर अंधेरा छा गया है। करीब 150 स्ट्रीट लाइटें बंद होने से राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। अंधेरे के कारण दुर्घटनाओं और सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

नगर निगम और बिजली कंपनी के बीच बकाया बिल को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है। निगम के कुल 1469 बिजली कनेक्शन हैं। भुगतान नहीं होने पर बिजली कंपनी ने अब कनेक्शन काटने की कार्रवाई तेज कर दी है। इसका सीधा असर शहर की रोशनी और सार्वजनिक सुविधाओं पर पड़ रहा है।

तीन सड़कों की स्ट्रीट लाइट बंद, सिटी बस डिपो और शौचालय भी प्रभावित

बिजली कंपनी की कार्रवाई में कोनी स्थित सिटी बस डिपो का एक कनेक्शन और बृहस्पति बाजार स्थित सार्वजनिक शौचालय का कनेक्शन काटा गया है। इसके अलावा तैबा चौक से मैग्नेटो मॉल, तैबा चौक से मदरसा गली और तैबा चौक से कुम्हारपारा रोड की स्ट्रीट लाइटों के कनेक्शन भी काट दिए गए हैं। इन मार्गों पर करीब 150 लाइटें बंद बताई जा रही हैं। कुम्हारपारा से मगरपारा जाने वाली सड़क पर भी अंधेरा छा गया है।

विकास भवन में पांच बिजली कनेक्शन हैं। इनमें से एक कनेक्शन दोपहर करीब 1 से 2 बजे तक बंद रहा, जिसे लगभग एक घंटे बाद दोबारा जोड़ दिया गया। निगम के अलावा दो अन्य सरकारी विभागों के बिजली कनेक्शन काटे जाने की भी जानकारी सामने आई है। बिजली कंपनी का कहना है कि बकाया भुगतान नहीं होने पर संबंधित कनेक्शनों की सप्लाई बंद की जा रही है।

38.55 करोड़ रुपये का भुगतान, फिर भी बकाया बरकरार

नगर निगम के बिजली बिलों की देनदारी और अब तक किए गए भुगतान के आंकड़े भी सवाल खड़े करते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में निगम और शासन के अलग-अलग मदों से कुल 38.55 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इसमें नगर निगम की ओर से 4.09 करोड़ रुपये, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से 31.77 करोड़ रुपये और 15वें वित्त आयोग से 2.69 करोड़ रुपये शामिल हैं।

इसके बावजूद बिजली बिल का बकाया करीब 280 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बड़ी देनदारी के बीच नियमित भुगतान की व्यवस्था क्यों नहीं बन पाई। बिजली बिलों का समय पर भुगतान नहीं होने से अब शहरवासियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

397 कनेक्शनों की बिलिंग में मिली गड़बड़ी, 57 करोड़ रुपये घटे

नगर निगम और बिजली कंपनी के बीच विवाद केवल भुगतान तक सीमित नहीं है। पुराने बिलों के हिसाब और उनकी शुद्धता पर भी सवाल उठे हैं। निगम के बिजली कनेक्शनों के एनर्जी ऑडिट में 397 कनेक्शनों की बिलिंग में गड़बड़ी सामने आई थी। इसके बाद बिल की राशि में करीब 57 करोड़ रुपये की कमी की गई।

बिलिंग में गड़बड़ी मिलने से यह स्पष्ट हुआ कि पुराने बिजली बिलों का सत्यापन और हिसाब का मिलान भी जरूरी है। हालांकि, राशि घटाए जाने के बावजूद निगम की देनदारी करोड़ों रुपये में बनी हुई है। ऐसे में बिजली कंपनी और निगम के बीच सभी कनेक्शनों के बिलों का मिलान कर वास्तविक बकाया तय करना महत्वपूर्ण है।

बिजली बिल की पेंडेंसी और खपत कम करने पर जोर

नगर निगम की मेयर पूजा विधानी ने बताया कि 38 करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल जमा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि बिल जमा नहीं होने पर इस तरह की दिक्कतें आती रहेंगी। बिजली बिल की लंबित राशि और खपत कम करने के लिए निगम के सभी भवनों में सोलर पैनल लगाने को कहा गया है।

वहीं, नगर निगम के बिजली विभाग के प्रभारी नीलेश पटेल ने बताया कि पांच जगहों पर कनेक्शन कटने की जानकारी मिली है। भुगतान की प्रक्रिया की जा रही है। विकास भवन का एक कनेक्शन काटा गया था, जिसे एक घंटे के भीतर दोबारा जोड़ दिया गया।

बकाया भुगतान और बंद स्ट्रीट लाइटों का समाधान जरूरी

बिजली बिल के विवाद का असर अब सार्वजनिक सुविधाओं पर पड़ रहा है। एक ओर निगम पर भारी बकाया है, तो दूसरी ओर बिलिंग में गड़बड़ी के कारण पुराने हिसाब की जांच भी जरूरी है। ऐसे में बिजली कंपनी और नगर निगम के बीच बकाया राशि का पारदर्शी मिलान, नियमित भुगतान और बंद स्ट्रीट लाइटों को दोबारा चालू करना जरूरी हो गया है, ताकि शहरवासियों को अंधेरे और उससे जुड़ी परेशानियों से राहत मिल सके।