डीईओ की कार्रवाई को बताया एकतरफा, कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग

बिलासपुर। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मल्हार के प्राचार्य सहित 3 शिक्षकों को हटाने के मामले में अब प्राचार्य मंच ने विरोध जताया है। मंच ने गुरुवार को कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई को एकतरफा बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। मंच का कहना है कि प्राचार्य और शिक्षकों का पक्ष सुने बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।

ज्ञापन में कहा गया है कि प्राचार्य वेद प्रकाश शुक्ला ने नवंबर 2025 में कार्यभार संभालने के बाद स्कूल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुशासित वातावरण बनाने के प्रयास किए। मंच का आरोप है कि इन प्रयासों में कुछ व्याख्याता और कर्मचारी सहयोग नहीं कर रहे थे। ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि कुछ व्याख्याताओं ने विद्यार्थियों को प्राचार्य के खिलाफ भड़काया और उन पर दबाव बनाया। मंच ने मांग की है कि विद्यार्थियों की शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करने से पहले सभी संबंधित पक्षों का पक्ष सुना जाए और तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाए।

प्राचार्य दिव्यांग हैं, जल्द होने वाले हैं सेवानिवृत्त

प्राचार्य मंच के संयोजक संजय शर्मा ने कहा कि प्राचार्य दिव्यांग हैं और लगभग एक साल बाद सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनके अनुसार, प्राचार्य नियमित रूप से स्कूल जाते हैं। ऐसे में उनका पक्ष सुने बिना कार्रवाई करना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। उन्होंने मांग की कि प्राचार्य और शिक्षकों की बात सुनकर गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाए।

डीईओ बोले- जांच के बाद हुई कार्रवाई

जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय ने बताया कि मामले में प्राचार्य और शिक्षकों के बयान लिए गए थे। जांच प्रतिवेदन और कलेक्टर के अनुमोदन के बाद स्कूल में शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने के उद्देश्य से कार्रवाई की गई। प्राचार्य मंच का ज्ञापन प्राप्त हुआ है, जिस पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

विवाद के बीच स्कूल में गुटबाजी के आरोप

मल्हार स्कूल में प्राचार्य को हटाने के मामले को लेकर पहले भी विवाद की स्थिति बनी थी। डीईओ के जांच के लिए स्कूल पहुंचने के दौरान एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष सुशांक लक्की मिश्रा अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे थे। इस दौरान हंगामा होने की बात भी सामने आई थी।

बताया जा रहा है कि स्कूल का स्टाफ दो गुटों में बंटा हुआ है। एक गुट प्राचार्य के समर्थन में है, जबकि दूसरा उनके विरोध में है। प्राचार्य को हटाए जाने के बाद प्राचार्य मंच के सामने आने से मामला और चर्चा में आ गया है। मंच का कहना है कि निष्पक्ष जांच के लिए सभी पक्षों को सुनना जरूरी है, जबकि शिक्षा विभाग का कहना है कि कार्रवाई जांच प्रतिवेदन के आधार पर की गई है।