निर्माण लागत में 300 से 400 रुपए प्रति वर्गफुट तक उछाल, सामग्री सस्ती होने पर ही बजट में राहत की उम्मीद
बिलासपुर। सीमेंट, लोहा और रेत की कीमतों में बढ़ोतरी ने मकान बनाने का बजट बिगाड़ दिया है। निर्माण सामग्री महंगी होने से मकान बनाने की लागत में करीब 15% तक इजाफा हुआ है। पहले जिस मकान के निर्माण में 20 लाख रुपए खर्च होते थे, अब उसके लिए 23 से 24 लाख रुपए तक खर्च करने पड़ सकते हैं। प्रति वर्गफुट निर्माण लागत भी करीब 300 से 400 रुपए तक बढ़ गई है। इसका असर निजी निर्माण के साथ रियल एस्टेट कारोबार और सरकारी निर्माण परियोजनाओं पर भी पड़ने की आशंका है।
निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों के मुताबिक, सीमेंट की प्रति बोरी कीमत में करीब 40 रुपए और लोहे की कीमत में प्रति किलो 11 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, रेत की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। पहले जहां प्रति वर्गफुट निर्माण की लागत करीब 1,400 रुपए थी, वह अब बढ़कर 1,800 रुपए तक पहुंच गई है। ऐसे में मकान बनाने की योजना बना रहे लोगों को पुराने बजट की तुलना में 3 से 4 लाख रुपए तक अतिरिक्त खर्च की तैयारी करनी पड़ रही है।
रेत घाट बंद होने से बढ़े दाम, हाइवा की कीमत 12 हजार रुपए तक
रेत की कीमतों में तेजी की एक प्रमुख वजह रेत घाटों का बंद होना बताया जा रहा है। फिलहाल घाटों से रेत की आपूर्ति बंद है और 16 अक्टूबर से इनके शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच रेत की उपलब्धता प्रभावित होने से ट्रैक्टर ट्रॉली और हाइवा से मिलने वाली रेत महंगी हो गई है।
निर्माण कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, बरसात से पहले 80 फीट रेत वाली ट्रैक्टर ट्रॉली करीब 1,500 रुपए में मिल रही थी, जिसकी कीमत अब बढ़कर 2,500 रुपए हो गई है। इसी तरह 500 फीट रेत वाले हाइवा की कीमत 8,000 रुपए से बढ़कर 12,000 रुपए तक पहुंच गई है। रेत की आपूर्ति सामान्य होने पर कीमतों में कितनी कमी आएगी, इसे लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सीमेंट और लोहे के दाम में भी उछाल
निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी केवल रेत तक सीमित नहीं है। अलग-अलग ब्रांड के सीमेंट की प्रति बोरी कीमत में करीब 40 रुपए तक की तेजी दर्ज की गई है। वहीं, लोहे के दाम प्रति किलो 11 रुपए तक बढ़े हैं। फिलहाल लोहे की कीमतों में स्थिरता बताई जा रही है, लेकिन आगे फिर तेजी आने की आशंका जताई जा रही है।
निर्माण सामग्री पुरानी कीमत मौजूदा कीमत डबल बुल, जेके लक्ष्मी सीमेंट 230-235 रुपए प्रति बोरी 280 रुपए प्रति बोरी अल्ट्राटेक सीमेंट 265-305 रुपए प्रति बोरी कीमत की पुष्टि आवश्यक अंबुजा सीमेंट 260 रुपए प्रति बोरी 290 रुपए प्रति बोरी रायगढ़ लोहा 48 रुपए प्रति किलो 59 रुपए प्रति किलो नाकोड़ा, गोयल लोहा 52 रुपए प्रति किलो 64 रुपए प्रति किलो रेत, 80 फीट ट्रैक्टर ट्रॉली 1,500 रुपए 2,500 रुपए रेत, 500 फीट हाइवा 8,000 रुपए 12,000-12,500 रुपए नोट: कीमतें उपलब्ध जानकारी के आधार पर हैं। अलग-अलग ब्रांड, गुणवत्ता, स्थान और आपूर्ति के अनुसार वास्तविक दरों में अंतर हो सकता है।
ईंट, गिट्टी, टाइल्स और मजदूरी भी बढ़ा रहे खर्च
मकान निर्माण में सीमेंट, लोहा और रेत के अलावा ईंट, गिट्टी, टाइल्स, दरवाजे-खिड़कियां, बिजली फिटिंग, प्लंबिंग और पेंट पर भी बड़ा खर्च होता है। इसके साथ सेंट्रिंग, छत की ढलाई, मजदूरी और फिनिशिंग की लागत भी जुड़ती है। इन मदों में कीमतें बढ़ने से मकान का कुल बजट और बढ़ जाता है। ऐसे में सीमित आय वाले परिवारों के लिए घर बनाना पहले की तुलना में अधिक मुश्किल हो रहा है।
निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी का असर मकान खरीदने वालों पर भी पड़ सकता है। निर्माण लागत बढ़ने से बिल्डरों की परियोजनाओं का बजट प्रभावित होता है। इसका असर नए मकानों की कीमतों पर पड़ने की आशंका है। हालांकि, सामग्री की कीमतें घटने पर मकान निर्माण और बिक्री की लागत में कितनी राहत मिलेगी, यह बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
सरकारी निर्माण परियोजनाओं पर भी पड़ेगा असर
निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों से सरकारी परियोजनाओं की लागत भी प्रभावित हो सकती है। पीडब्ल्यूडी, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, मंडी बोर्ड, राष्ट्रीय राजमार्ग और सेतु विभाग सहित विभिन्न विभागों में भवन, सड़क और अन्य निर्माण कार्य चल रहे हैं। इनमें से कई कार्यों के टेंडर पुरानी अनुसूचित दरों (एसओआर) के आधार पर जारी किए गए हैं।
टेंडर जारी होने के बाद निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी होने से ठेकेदारों की लागत और स्वीकृत ठेका राशि के बीच अंतर बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में निर्धारित बजट के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सामग्री की कीमतों में राहत नहीं मिलने पर निजी निर्माण के साथ सरकारी परियोजनाओं की रफ्तार और लागत पर भी असर पड़ने की आशंका है।