बिलासपुर। कार खरीदने की जिद पूरी नहीं हुई तो एक नाबालिग ने खुद के अपहरण की झूठी कहानी रचकर पिता से 5 लाख रुपये की फिरौती मांग ली। मंगलवार सुबह ट्यूशन जाने के लिए घर से निकले नाबालिग ने करीब डेढ़ घंटे बाद अपने ही मोबाइल से पिता को मैसेज भेजा कि उसका अपहरण हो गया है। उसे छोड़ने के लिए 5 लाख रुपये देने होंगे। बेटे के अपहरण का मैसेज मिलते ही पिता घबरा गए और रतनपुर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस और एसीसीयू की टीम ने करीब 4 घंटे की तलाश के बाद शाम 4 बजे ग्राम सेलर से उसे सकुशल बरामद कर लिया।


जानकारी के अनुसार, नाबालिग मंगलवार सुबह करीब 9 बजे स्कूटी से ट्यूशन पढ़ने लखराम गांव जाने के लिए निकला था। करीब डेढ़ घंटे बाद पिता के मोबाइल पर उसके नंबर से अपहरण का मैसेज आया। इसमें छोड़ने के बदले 5 लाख रुपये की मांग की गई थी। पिता ने सुबह 11:30 बजे रतनपुर थाने पहुंचकर इसकी सूचना दी। मामला गंभीर होने पर एएसपी मधुलिका सिंह के नेतृत्व में पुलिस और एसीसीयू की टीम उसकी तलाश में जुट गई।


जांच के दौरान ग्राम चोरहा देवरी के तालाब के पास उसकी स्कूटी मिली। मोबाइल की आखिरी लोकेशन भी इसी इलाके में मिली थी। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में तलाश कर रही थी, तभी नाबालिग ने पिता को फोन कर ग्राम सेलर में सुरक्षित होने की जानकारी दी। पुलिस टीम वहां पहुंची और उसे सकुशल थाने ले आई। पूछताछ में उसने बताया कि वह कार खरीदना चाहता था। परिवार के लोग उसकी मांग पूरी नहीं कर रहे थे, इसलिए उन पर दबाव बनाने के लिए खुद के अपहरण की कहानी रची और फिरौती का मैसेज भेज दिया।


बच्चों की हर जिद पूरी न करें, 'ना' सुनना भी सिखाएं


बच्चों का महंगी चीजों के लिए लगातार दबाव बनाना परिवार में संवाद की कमी और हर मांग तुरंत पूरी करने की अपेक्षा का संकेत हो सकता है। अभिभावकों को बच्चों से खुलकर बातचीत करनी चाहिए और उनकी भावनाओं को समझना चाहिए। हर जिद पूरी करने के बजाय उन्हें जरूरत और इच्छा के बीच का अंतर समझाना जरूरी है। प्यार से समझाते हुए बच्चों को जरूरत पड़ने पर 'ना' सुनना भी सिखाना चाहिए।