23 और लोगों को नोटिस, निगम के 5 कर्मचारी भी टीम में शामिल; 28 से 31 अक्टूबर तक कार्रवाई

बिलासपुर में कुदुदंड से उसलापुर आरओबी तक खसरा नंबर 1552 की जमीन के सीमांकन को लेकर राजस्व विभाग ने नई तैयारी की है। पहले सीमांकन के लिए 100 लोगों को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग ने सूची में छूट गए 23 लोगों को भी नोटिस जारी कर दिया है। अब कुल 123 लोगों की जमीन की नापजोख की जाएगी। सीमांकन की तारीख भी दो दिन आगे बढ़ा दी गई है। अब 28 से 31 अक्टूबर तक चार दिनों में सीमांकन किया जाएगा।

जमीन और नाली की दिशा मोड़ने को लेकर जिन लोगों के घरों के सामने विवाद है, उनमें से कुछ लोगों को सीमांकन के लिए नोटिस ही नहीं दिया गया था। इसके बाद राजस्व विभाग ने संशोधित आदेश जारी कर छूटे हुए लोगों को भी प्रक्रिया में शामिल किया। इनमें राजेंद्र सिंघानिया, संतोष सिंघानिया, डीडी बजाज और कबीर चड्डा सहित अन्य लोग शामिल हैं।

सीमांकन टीम में निगम के 5 कर्मचारी शामिल

नई व्यवस्था के तहत सीमांकन टीम में भी बदलाव किया गया है। पहले नगर निगम की ओर से इंजीनियर हितेश मक्कड़ को शामिल किया गया था, लेकिन संशोधित आदेश में उनकी जगह निगम के 5 कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई है। इनमें सब इंजीनियर राघवेंद्र राजपूत, जुगल सिंह और अरुण यादव के साथ पटवारी हरीश जैन तथा राजस्व निरीक्षक रामायण कौशिक शामिल हैं। राजस्व विभाग की ओर से तहसीलदार, 4 राजस्व निरीक्षक और पटवारी को भी टीम में रखा गया है।

चार दिनों तक चलने वाली इस प्रक्रिया में सड़क की जमीन की वास्तविक सीमा तय करने के साथ संबंधित पक्षों के बीच विवाद वाले हिस्सों की स्थिति स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा। सीमांकन के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि संबंधित जमीन की वास्तविक सीमा कहां तक है और सड़क तथा नाली को लेकर उठ रहे विवाद का जमीन पर क्या स्वरूप है।

रिकॉर्ड नहीं मिलने से पहले दिन नहीं हो सका सीमांकन

इससे पहले सोमवार, 26 अक्टूबर को न्यायालय अतिरिक्त तहसीलदार बिलासपुर के आदेश पर राजस्व टीम ग्राम मंगला में खसरा नंबर 1552 की जमीन का सीमांकन करने पहुंची थी, लेकिन संबंधित भूमि का राजस्व रिकॉर्ड मौके पर उपलब्ध नहीं होने के कारण टीम को बिना सीमांकन किए लौटना पड़ा। इस संबंध में पंचनामा भी तैयार किया गया।

पंचनामा के अनुसार, सीमांकन के लिए संबंधित पक्षों और आसपास के भूमिस्वामियों को पहले सूचना दी गई थी। इसके बावजूद मौके पर भूमि से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पाया। रिकॉर्ड के अभाव में जमीन की वास्तविक सीमा निर्धारित करने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। अब संशोधित कार्यक्रम के तहत 28 से 31 अक्टूबर तक होने वाले सीमांकन में रिकॉर्ड की उपलब्धता और मौके पर जमीन की स्थिति स्पष्ट होना अहम रहेगा।