बिलासपुर। शहर में बरसात के दौरान जर्जर और क्षतिग्रस्त मकान लोगों के लिए खतरे का सबब बने हुए हैं। नगर निगम द्वारा पूर्व में शहर के कई जर्जर मकानों को चिन्हित किए जाने के बावजूद कई स्थानों पर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। ऐसा ही एक मामला गोंडपारा क्षेत्र से सामने आया है, जहां मुन्नू लाला शुक्ला स्कूल के सामने वाली गली में शंकर साहू के मकान के बाजू में स्थित एक मकान का हिस्सा करीब 15-17 दिन पहले गिर चुका है। इसके बावजूद शेष जर्जर हिस्सा अब भी मौके पर मौजूद है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मकान गिरने की जानकारी नगर निगम के सुपरवाइजर के साथ ही संबंधित अधिकारियों और वार्ड के पार्षद को भी दी जा चुकी है। वार्डवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या की ओर जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित कराया, लेकिन अब तक नगर निगम की ओर से न तो जर्जर हिस्से को हटाने की कार्रवाई की गई और न ही आम लोगों की सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी इंतजाम किया गया है।
बच्चों और बुजुर्गों की आवाजाही, खतरा लगातार बरकरार
जिस स्थान पर मकान का जर्जर हिस्सा मौजूद है, वहां से दिनभर लोगों की आवाजाही होती रहती है। आसपास रहने वाले छोटे-छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भी इसी रास्ते से गुजरते हैं। ऐसे में यदि बारिश के दौरान मकान का बचा हुआ हिस्सा अचानक भरभराकर गिरता है तो इसकी चपेट में राहगीर आ सकते हैं और गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के कारण पुराने और कमजोर भवनों की स्थिति और खराब हो सकती है। ऐसे में किसी हादसे का इंतजार करने के बजाय नगर निगम को तत्काल मौके का निरीक्षण कर जर्जर हिस्से को सुरक्षित तरीके से हटाने अथवा आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था करने की जरूरत है।
चिन्हित जर्जर मकानों पर कार्रवाई की मांग
गौरतलब है कि बिलासपुर नगर निगम द्वारा पिछले दिनों शहर में जर्जर और खतरनाक स्थिति वाले कई मकानों को चिन्हित किया गया था। निगम की इस कार्रवाई का उद्देश्य बारिश के मौसम में संभावित दुर्घटनाओं को रोकना था, लेकिन स्थानीय स्तर पर कई चिन्हित भवनों के संबंध में आगे की कार्रवाई नहीं होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
गोंडपारा का यह मामला भी इसी स्थिति की ओर इशारा करता है। लोगों का कहना है कि किसी जर्जर मकान के गिरने के बाद भी यदि उसके शेष हिस्से को समय रहते सुरक्षित नहीं किया गया तो यह गंभीर लापरवाही साबित हो सकती है।
हादसे से पहले कार्रवाई की मांग
वार्डवासियों ने नगर निगम के अधिकारियों से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके का निरीक्षण कराया जाए और शेष जर्जर मकान को सुरक्षित तरीके से हटाने अथवा उसे घेरकर लोगों की आवाजाही से दूर करने की व्यवस्था की जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई हादसा होने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले होनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष की जान खतरे में न पड़े।
बरसात के मौसम में शहर में ऐसे अन्य जर्जर भवन भी यदि मौजूद हैं तो नगर निगम को उनका दोबारा सर्वे कराकर प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षा कार्रवाई करनी चाहिए। गोंडपारा के रहवासियों को अब इंतजार है कि उनकी शिकायत पर निगम कब जागता है और संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए कब कदम उठाता है।