वीआईपी इलाके में अंधेरा और खुला नाला बना जानलेवा; हादसे के 24 घंटे बाद भी नहीं डाला गया स्लैब, नगर निगम मुख्यालय महज 200 मीटर दूर

बिलासपुर। शहर के वीआईपी इलाके में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के आवास के सामने खुले नाले में गिरकर बाइक सवार युवक की मौत हो गई। नेहरू चौक से इंदु सेतु जाने वाली सड़क पर मंगलवार रात करीब 12:15 बजे हुए इस हादसे ने नगर निगम की व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि घटनास्थल से नगर निगम मुख्यालय की दूरी महज 200 मीटर है। इसके बावजूद सड़क किनारे नाला महीनों से खुला पड़ा है और स्ट्रीट लाइटें भी बंद हैं। हादसे के 24 घंटे बाद तक खुले नाले को ढंकने के लिए स्लैब नहीं लगाया गया था।

मृतक की पहचान मुंगेली निवासी मनीष कुमार सेंद्रे (30), पिता सुखचैन सेंद्रे के रूप में हुई है। वह सरकंडा स्थित शिव मोटर्स में मोटर मैकेनिक था और सकरी की गोकुलधाम कॉलोनी में रहता था। मंगलवार रात वह बाइक से सकरी लौट रहा था। नेहरू चौक के मोड़ पर उसकी बाइक सड़क किनारे खुले नाले में जा गिरी। सूचना मिलने पर 112 की टीम और सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची। युवक को तत्काल सिम्स अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

वीआईपी इलाके में भी सुरक्षा के इंतजाम नदारद

यह सड़क शहर के व्यस्त मार्गों में शामिल है, जहां दिन-रात लोगों और वाहनों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद सड़क किनारे खुला नाला वाहन चालकों के लिए खतरा बना हुआ है। रात में स्ट्रीट लाइटें बंद रहने से नाला दिखाई नहीं देता। ऐसे में वाहन चालकों के लिए दुर्घटना से बचना मुश्किल हो जाता है। जिस इलाके में मंत्री का आवास है और जहां से नगर निगम मुख्यालय कुछ ही दूरी पर है, वहां बुनियादी सुरक्षा इंतजामों की यह स्थिति व्यवस्था पर सवाल उठाती है।

युवक की मौत के बाद भी खुले नाले पर स्लैब नहीं डाला जाना जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी? यदि नाला खुला होने और स्ट्रीट लाइट बंद रहने की जानकारी पहले से थी, तो समय रहते सुधार क्यों नहीं किया गया?

शहर में सैकड़ों स्ट्रीट लाइटें खराब

शहर में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत विकसित सड़कों और नालों के बावजूद कई स्थानों पर सुरक्षा संबंधी समस्याएं बनी हुई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शहर में करीब 36 हजार स्ट्रीट लाइटें लगी हैं, जिनमें 350 से अधिक खराब हैं। नेहरू चौक से मंगला चौक के बीच 60 में से 50 लाइटें बंद हैं, जबकि 10 की रोशनी कम है। संजय तरण पुष्कर से स्वीमिंग पूल के बीच 18, गणेश चौक से अमेरी के बीच 12, नर्मदा नगर से उसलापुर के बीच 35 और उसलापुर से फोर्ड शोरूम के बीच 32 लाइटें बंद बताई गई हैं।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि शहर के कई मार्गों पर रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। खुले नाले, खराब सड़कें और बंद स्ट्रीट लाइटें मिलकर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा रही हैं। ऐसे में केवल हादसे के बाद जांच करना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि खतरनाक स्थानों की पहचान कर तत्काल सुधार किया जाए।

एक दिन पहले मंत्री ने जताई थी नाराजगी

संयोग देखिए कि हादसे से एक दिन पहले ही केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने शहर की खराब सड़कों और नालियों को लेकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। इसके अगले ही दिन उनके आवास के सामने खुले नाले में गिरकर एक युवक की मौत हो गई। यह घटना बताती है कि निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं में सुधार कितना जरूरी है।

जांच से संतुष्ट नहीं होने पर न्यायालय जा सकते हैं परिजन

हाई कोर्ट के अधिवक्ता रोहित शर्मा के अनुसार, खुले नाले में गिरने से हुई मौत के मामले में संबंधित विभाग और ठेकेदार की संभावित लापरवाही की जांच की जा सकती है। परिजन पुलिस में शिकायत देकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग कर सकते हैं। यदि वे जांच या कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होते, तो पहले थाना प्रभारी और पुलिस अधीक्षक को आवेदन दे सकते हैं। वहां से कार्रवाई नहीं होने पर न्याय के लिए न्यायालय का रुख करने का विकल्प भी मौजूद है।

पुलिस जांच में टक्कर की आशंका

सिविल लाइन थाना प्रभारी रवि तिवारी ने बताया कि शुरुआती जांच में किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से हादसा होने की आशंका है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सड़क किनारे खुला नाला और बंद स्ट्रीट लाइटें हादसे की आशंका बढ़ा रही थीं, तो जिम्मेदार विभागों ने समय रहते इन्हें दुरुस्त क्यों नहीं किया? एक युवक की जान जाने के बाद अब यह तय करना जरूरी है कि सुरक्षा संबंधी इस चूक के लिए कौन जिम्मेदार है और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।