बिलासपुर। भटगांव से लगे ग्राम जुनवानी में खेत की मेड़ को लेकर हुए विवाद में बुजुर्ग किसान की हत्या के मामले में अब मृतक के बेटों ने पुलिस जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच कराने, आरोपियों का नार्को टेस्ट कराने और जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि घटना में मुख्य आरोपी के साथ उसके बेटे भी शामिल थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें जांच के बाद छोड़ दिया।
जानकारी के अनुसार, ग्राम जुनवानी निवासी 70 वर्षीय तुलसी टंडन 10 जुलाई 2026 की सुबह सुखाडीह-सेमरसाही स्थित अपने खेत में तिल की बुवाई करने के लिए साइकिल से निकले थे। उनके पास तिल के बीज, पानी की बोतल और गैंती थी। शाम करीब 6 बजे तक जब वह घर नहीं लौटे तो परिजनों ने खेत जाकर उनकी तलाश की। वहां तुलसी टंडन मृत अवस्था में मिले। उनके सीने में गैंती धंसी हुई थी।
खेत की मेड़ को लेकर था विवाद
परिजनों के अनुसार, पुलिस की जांच में सामने आया कि तुलसी टंडन का पड़ोसी किसान सकराम उर्फ बजरंग कुर्रे से खेत की मेड़ को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि तुलसी अक्सर सकराम के खेत की मेड़ को खुरच देते थे, जिसको लेकर दोनों के बीच पहले भी विवाद हुआ था।
पुलिस की जांच के मुताबिक घटना वाले दिन भी दोनों के बीच इसी बात को लेकर विवाद हुआ। इसी दौरान तुलसी के हाथ से गैंती छूट गई और उसी गैंती से उनके सीने पर वार किए जाने की बात सामने आई। गंभीर चोट लगने से तुलसी टंडन की मौके पर ही मौत हो गई।
इस मामले में पुलिस ने 67 वर्षीय सकराम कुर्रे को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था।
बेटों का आरोप- अकेला आरोपी नहीं, बेटे भी थे शामिल
मृतक के बेटे बालेश्वर दास टंडन ने बिलासपुर प्रेस क्लब में अपनी बात रखते हुए पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि उनके पिता की हत्या में सकराम कुर्रे अकेला शामिल नहीं था, बल्कि उसके बेटे पवन कुर्रे, गौतम कुर्रे और प्रदीप कुर्रे की भी भूमिका थी। परिजनों का दावा है कि पुलिस ने इन लोगों को जांच में क्लीन चिट दे दी।
बालेश्वर दास टंडन के अनुसार, घटना की सुबह पवन कुर्रे को गांव में एक घर की ओर भागते हुए देखा गया था। वह वहां पानी पीने भी गया था। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में छोड़ दिया गया। इसी आधार पर मृतक के बेटे पुलिस की जांच और आरोपियों को छोड़ने की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं।
लेनदेन का भी लगाया आरोप
मृतक के बेटों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि कार्रवाई में निष्पक्षता नहीं बरती गई और लेनदेन के चलते आरोपियों को बचाया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के साथ पुनः जांच की मांग
मृतक के परिजनों ने मामले की नए सिरे से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्यों और घटनास्थल से जुड़े सभी तथ्यों की दोबारा जांच कराने की मांग रखी है। साथ ही आरोपी के बेटों का नार्को टेस्ट कराने और पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग भी की गई है।
परिजनों का कहना है कि जब तक घटना में शामिल सभी लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक उन्हें न्याय मिलने का भरोसा नहीं है। उन्होंने पुलिस जांच पर उठ रहे सवालों को दूर करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
फिलहाल मामले में पुलिस की ओर से सकराम कुर्रे के खिलाफ की गई कार्रवाई और आगे की जांच ही आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा है। मृतक के बेटों द्वारा लगाए गए अन्य आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
