
*मुंगेली।* जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी केवल शहर के विकास कार्यों तक सीमित नहीं होती, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और जीव-जंतुओं के प्रति करुणा भी उसके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। ऐसा ही एक दृश्य मुंगेली के गौरव पथ मार्ग पर देर रात देखने को मिला, जब नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला ने अपने साथियों के साथ एक अस्वस्थ गाय को देखकर तत्काल उसके उपचार की व्यवस्था कराई।
इस दौरान उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता पीनू वैष्णव और युवा कार्यकर्ता असद खोखर भी मौजूद थे। गाय की स्थिति पर ध्यान देते हुए तीनों ने उसके उपचार के लिए आवश्यक व्यवस्था की और पशु चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की पहल की।
रोहित शुक्ला का यह प्रयास इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि आमतौर पर नगर पालिका अध्यक्ष की पहचान शहर के विकास कार्यों, सड़क, नाली, सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी होती है। लेकिन इस घटना में उनका एक अलग सामाजिक और मानवीय पक्ष भी देखने को मिला।
उनके व्यक्तित्व की एक खास बात यह भी है कि दूसरे कई नगर पालिका अध्यक्षों या महापौरों की तरह उनके साथ बॉडीगार्डों का बड़ा काफिला, बड़ी-बड़ी गाड़ियों और कड़क सफेद कुर्ते के साथ दिखने वाला तामझाम नजर नहीं आता। रोहित शुक्ला सामान्य पहनावे और सहज अंदाज में आम लोगों के बीच आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। उनसे मिलने के लिए किसी बड़े प्रोटोकॉल या खास तामझाम की जरूरत महसूस नहीं होती। यही सहजता उनके व्यवहार को अलग पहचान देती है।
अक्सर देखने में आता है कि जिम्मेदार पद मिलने के बाद कुछ लोगों के व्यवहार में बदलाव आने लगता है। उनके आसपास एक अलग तरह का रुतबा, एटीट्यूड और दूरी दिखाई देने लगती है। रोहित शुक्ला को भी कई लोग सलाह देते हैं कि अब आप एक जिम्मेदार पद पर हैं, थोड़ा रौब और अकड़ रखनी चाहिए। लेकिन वे ऐसी बातों पर नाराज होने के बजाय मुस्कुराकर बात टाल देते हैं।
जरूरतमंदों के लिए उपलब्ध रहना, बेजुबान जीवों के प्रति संवेदनशील रहना और अपने मूल स्वभाव को पद के प्रभाव में बदलने न देना, उनके व्यक्तित्व की अलग पहचान है।
गौरतलब है कि एक जनप्रतिनिधि की वास्तविक पहचान केवल उसके पद और अधिकारों से नहीं, बल्कि आम लोगों और बेजुबान जीवों के प्रति उसके व्यवहार और संवेदनशीलता से भी होती है।
क्योंकि पद की ऊंचाई से ज्यादा महत्वपूर्ण इंसान के भीतर सेवा भाव और अच्छे संस्कारों का होना है।