बिलासपुर सहित चार शहरों में महिला ड्राइवर और कंडक्टरों की भर्ती की तैयारी, दिल्ली में होगी कार्यशाला
बिलासपुर। शहर की सड़कों पर जल्द दौड़ने वाली इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में अब महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की तैयारी है। बिलासपुर सहित रायपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा में शुरू होने वाली ई-बस सेवाओं में महिला ड्राइवरों और कंडक्टरों को भी नियुक्त करने की योजना बनाई जा रही है। इस पहल से महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी।
केंद्र सरकार ने इस संबंध में राज्य शासन को पत्र भेजकर आवश्यक पहल करने को कहा है। महिला चालकों को प्रोत्साहित करने और भर्ती की संभावनाओं पर चर्चा के लिए चारों शहरों के ई-बस नोडल अधिकारियों को दिल्ली बुलाया गया है। वहां प्रस्तावित कार्यशाला में महिला ड्राइवरों की नियुक्ति, प्रशिक्षण और संचालन से जुड़े पहलुओं पर विचार किया जाएगा। ई-बस सेवा के नोडल अधिकारी अनुपम तिवारी के अनुसार, संबंधित कंपनियां महिला अभ्यर्थियों को ड्राइविंग की मुफ्त ट्रेनिंग देने के लिए भी तैयार हैं।
देश के कई शहरों में महिलाएं पहले से सार्वजनिक परिवहन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। भुवनेश्वर की मो बस सेवा में करीब 40 प्रतिशत कंडक्टर महिलाएं हैं। वर्ष 2023 में यहां 180 महिलाओं को कंडक्टर के रूप में नियुक्त किया गया था, जिनमें से 20 को भारी वाहन चलाने का प्रशिक्षण भी दिया गया। ओडिशा के केन्दुझर में शुभलक्ष्मी महानंदा राज्य की पहली महिला ई-बस चालक बनी हैं। नागपुर में 2019 में पांच तेजस्विनी महिला विशेष इलेक्ट्रिक बसें शुरू की गई थीं, जिनमें ड्राइवर और कंडक्टर दोनों महिलाएं थीं। दिल्ली परिवहन निगम में जून 2026 तक 1002 महिला कंडक्टर और 77 महिला ड्राइवर कार्यरत थीं।
नवंबर में पहुंचेंगी पहली 20 बसें
बिलासपुर में ई-बस सेवा शुरू करने की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं। पहले चरण में नवंबर में 20 बसें आने की संभावना है। इसके बाद दिसंबर से शहर में 30 बसों का संचालन शुरू करने की योजना है। कोनी स्थित ई-बस डिपो में चार्जिंग स्टेशन, पार्किंग और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित कर ली गई हैं। नगर निगम प्रशासन ने बसों के लिए रूट भी निर्धारित कर दिए हैं।
इलेक्ट्रिक बसों में गियर बदलने की जरूरत नहीं होती और इनका संचालन डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से किया जाता है। इस लिहाज से इन्हें पारंपरिक बसों की तुलना में चलाना कुछ आसान माना जाता है। हालांकि, महिला चालकों के लिए भारी वाहन का लाइसेंस, आवश्यक प्रशिक्षण और सड़क पर वाहन चलाने का अनुभव जरूरी होगा।
ई-बस सेवा के नोडल अधिकारी अनुपम तिवारी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में संचालित होने वाली बसों में महिला ड्राइवर और कंडक्टरों को अवसर देने के लिए दिल्ली में कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कंपनियां महिला चालकों को मुफ्त प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराएंगी।