बिलासपुर। पचपेड़ी थाना क्षेत्र के ग्राम चिल्हाटी में तालाब में डूबने से दो मासूम भाइयों की मौत हो गई। हादसे के बाद पिता और ग्रामीणों ने दोनों बच्चों को समय रहते तालाब से बाहर निकाल लिया था। परिजनों के अनुसार उस समय दोनों की सांसें चल रही थीं, लेकिन उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय पहले गांव के झोलाछाप डॉक्टर के पास ले जाया गया। वहां से पचपेड़ी स्वास्थ्य केंद्र और फिर मस्तूरी स्वास्थ्य केंद्र रेफर किए जाने के बाद डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया।

हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। एक ही परिवार के दो मासूम बेटों की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। दोनों का अंतिम संस्कार शाम को किया गया।

तालाब किनारे मिले संघर्ष के निशान

मुक्तिधाम के ठीक पास स्थित इसी तालाब में गुरुवार शाम हादसा हुआ था। घटना के करीब 24 घंटे बाद भी घटनास्थल पर 4 वर्षीय चिंटू की चप्पल जस की तस पड़ी मिली। तालाब के किनारे पानी में डूबने से पहले बच्चों द्वारा संघर्ष किए जाने के निशान भी दिखाई दिए।

बताया गया कि 7 वर्षीय दीपू और उसका छोटा भाई चिंटू तालाब के पास थे। कुछ देर बाद जब दोनों बच्चे दिखाई नहीं दिए तो पिता भक्त प्रहलाद पैकरा उन्हें तलाशते हुए तालाब किनारे पहुंचे। पानी में बच्चे की चप्पल तैरती दिखाई देने पर उन्होंने बिना देर किए तालाब में छलांग लगा दी।

पिता ने चार बार लगाया गोता, फिर मिला बड़ा बेटा

मृत बच्चों के पिता भक्त प्रहलाद पैकरा ने बताया कि उन्होंने गहरे पानी में कई बार गोता लगाकर बच्चों को तलाशने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में उनका पता नहीं चला। घबराहट में उन्होंने अपने भाइयों को फोन कर बुलाया और दोबारा तालाब में उतरे। इस दौरान उन्हें बड़ा बेटा दीपू मिला। उन्होंने उसे बाहर निकाला और सीने से लगाकर रोने लगे।

कुछ देर बाद उनके भाई भी मौके पर पहुंच गए। परिजनों ने बच्चों के पेट से पानी निकालने का प्रयास किया। इसके बाद भाई ने तालाब में उतरकर छोटे बेटे चिंटू को भी बाहर निकाला। परिजनों के अनुसार दोनों बच्चों में उस समय सांस चलती महसूस हो रही थी।

पहले गांव के डॉक्टर के पास ले गए, फिर अस्पतालों में रेफर

बच्चों को तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन पहले गांव के एक डॉक्टर के पास पहुंचे। वहां से दोनों को पचपेड़ी स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की सलाह दी गई। पचपेड़ी पहुंचने पर स्वास्थ्य कर्मियों ने बच्चों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें मस्तूरी स्वास्थ्य केंद्र ले जाने को कहा।

परिजन दोनों बच्चों को लेकर मस्तूरी पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल पहुंचने में हुई देरी को लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं।

विशेषज्ञ: डूबने के तुरंत बाद सीपीआर से बच सकती है जान

सिम्स के एनेस्थीसिया विभाग की एचओडी और सीपीआर विशेषज्ञ डॉ. मधुमिता मूर्ति के अनुसार पानी में डूबने के बाद पीड़ित को जितनी जल्दी संभव हो बाहर निकालकर तत्काल सीपीआर दिया जाना चाहिए। सीपीआर एक आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा प्रक्रिया है, जो सांस या दिल की धड़कन रुकने की स्थिति में जीवन बचाने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

ऐसे मामलों में एंबुलेंस बुलाने के साथ-साथ प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा तत्काल प्राथमिक उपचार और सीपीआर शुरू करना बेहद महत्वपूर्ण होता है।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलने पर पचपेड़ी पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और वहां से मासूम की चप्पल बरामद की है। परिजनों और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

पचपेड़ी थाना प्रभारी कमला पुसाम ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। घटनास्थल से मासूम की चप्पल मिली है। परिजनों और ग्रामीणों के बयान लिए जा रहे हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

दो मासूम भाइयों की एक साथ हुई मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। तालाब किनारे पड़े बच्चों के सामान और संघर्ष के निशान हादसे की भयावहता को बयां कर रहे हैं।