बिलासपुर मंडल के 2430 रूट किलोमीटर में से 2380 किमी ट्रैक पर कवच का काम बाकी, हादसे के बाद बिलासपुर-चांपा सेक्शन को दी गई थी प्राथमिकता

बिलासपुर। लालखदान में मेमू और मालगाड़ी की टक्कर में 14 लोगों की मौत के एक साल बाद भी रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मजबूत नहीं हो पाई है। हादसे के बाद ट्रेनों की टक्कर रोकने के लिए स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली कवच लगाने का काम तेज करने का दावा किया गया था, लेकिन अब तक दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 264 सक्रिय इंजनों में से 26 में कवच के उपकरण नहीं लग पाए हैं। वहीं, बिलासपुर रेल मंडल के 2430 रूट किलोमीटर में से करीब 2380 किलोमीटर रेलमार्ग पर कवच लगाने का काम अधूरा है। हादसे के बाद सबसे पहले बिलासपुर-चांपा रेलखंड में कवच लगाने की प्राथमिकता तय की गई थी, लेकिन यहां भी करीब 50 किलोमीटर हिस्से में ही ट्रायल और टेस्टिंग पूरी हो सकी है।

4 नवंबर 2025 को लालखदान रेलवे फाटक के पास मेमू और मालगाड़ी की भिड़ंत हुई थी। इस हादसे में 14 यात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि 20 लोग घायल हुए थे। जांच में लाल सिग्नल पार करना यानी सिग्नल ओवरशूट हादसे की प्रमुख वजह सामने आई थी। इसके बाद रेलवे ने करीब 1654 करोड़ रुपये की कवच परियोजना को गति देने की बात कही थी। इस प्रणाली का उद्देश्य मानवीय चूक की स्थिति में भी ट्रेनों को टकराने से बचाना है, लेकिन एक साल बाद भी बिलासपुर मंडल के अधिकांश रेलमार्ग पर यह सुरक्षा कवच नहीं पहुंच पाया है।

प्राथमिकता वाले रेलखंड में भी सीमित काम

बिलासपुर-चांपा रेलखंड यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही के लिहाज से बेहद व्यस्त है। हादसे के बाद इस सेक्शन को प्राथमिकता दी गई थी। यहां करीब 50 किलोमीटर हिस्से में ट्रायल और टेस्टिंग पूरी हुई है। इसमें बिलासपुर-जयरामनगर के बीच इंजन चलाकर परीक्षण भी किया गया। दूसरी ओर गेवरा रोड-कोरबा-चांपा और चांपा-झारसुगुड़ा सेक्शन में रेडियो टावर, ऑप्टिकल फाइबर केबल और अन्य जरूरी उपकरण लगाने का काम जारी है।

जांच में लोको पायलट और रेल अधिकारियों पर कार्रवाई

हादसे की जांच रिपोर्ट में दिवंगत लोको पायलट विद्यासागर को लाल सिग्नल पार करने और ट्रेन नियंत्रित नहीं कर पाने के लिए जिम्मेदार माना गया। सहायक लोको पायलट रश्मि राज पॉल को सतर्कता में कमी के आरोप में सेवा से बर्खास्त किया गया। वहीं, अनिवार्य सुरक्षा परीक्षा पास किए बिना 40 लोको पायलटों से ड्यूटी कराने की प्रशासनिक चूक के मामले में तत्कालीन डीआरएम राजमल खाईवाल समेत चार अधिकारियों का तबादला किया गया।

ब्लड सैंपल में एथेनॉल मिलने पर भी उठे सवाल

हादसे की जांच के दौरान चालक दल के रक्त नमूनों में 3 से 10 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर एथेनॉल पाया गया था, जबकि ड्यूटी के दौरान किए गए ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण में अल्कोहल की मात्रा शून्य थी। रेलवे के चिकित्सा अधिकारियों ने सीआरएस को बताया कि इतनी कम मात्रा की सटीक जांच करना प्रयोगशालाओं के लिए चुनौतीपूर्ण है। रनिंग स्टाफ का कहना है कि शराब का सेवन नहीं करने पर भी शरीर में प्राकृतिक प्रक्रियाओं से एथेनॉल बन सकता है। रेलवे के नियमों में रक्त में अल्कोहल की मात्रा शून्य होना अनिवार्य है। ऐसे में कर्मचारियों ने सवाल उठाया है कि इतनी कम मात्रा को शराब के सेवन से जोड़ने का आधार क्या होगा। उन्होंने रेलवे बोर्ड से इस संबंध में स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है।

एक साल में कई रेल हादसे, सुरक्षा पर फिर सवाल

लालखदान हादसे के बाद भी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अलग-अलग रेलखंडों में दुर्घटनाएं सामने आई हैं। 9 अक्टूबर 2025 को मड़वारानी स्टेशन के पास छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के पहियों में लोहे का एंगल फंस गया था। 7 मार्च 2026 को कटनी मुड़वारा के पास कोयले से लदी मालगाड़ी पटरी से उतर गई। 11 जुलाई 2026 को बिलासपुर में शंकर नगर आरओबी के नीचे मालगाड़ी का एक वैगन बेपटरी हुआ। इसके दो दिन बाद 13 जुलाई को करगीरोड स्टेशन पर जेसीबी के बकेट से टकराकर मालगाड़ी के तीन डिब्बे पटरी से उतर गए। इससे पहले 3 मई 2025 को बिलासपुर-कोरबा मेमू गलत सिग्नल के कारण लोडिंग साइडिंग तक पहुंच गई थी।

ऐसे काम करता है कवच

कवच स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। इसमें ट्रैक पर लगे उपकरणों और इंजन में स्थापित सिस्टम के जरिए ट्रेन की लोकेशन, गति और सिग्नल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है। ट्रेन के लाल सिग्नल पार करने या निर्धारित गति सीमा से अधिक चलने पर सिस्टम ड्राइवर को चेतावनी देता है। यदि ड्राइवर समय पर ब्रेक नहीं लगाता तो कवच खुद इमरजेंसी ब्रेक लगा देता है। इससे मानवीय चूक के कारण होने वाली संभावित टक्कर को रोकने में मदद मिलती है। कोहरे और बारिश जैसी परिस्थितियों में भी यह सुरक्षा व्यवस्था उपयोगी है।

नागपुर से झारसुगुड़ा तक 614 किमी में काम जारी

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में नागपुर से झारसुगुड़ा तक करीब 614 किलोमीटर रेलमार्ग पर कवच लगाने का काम चल रहा है। नागपुर-दुर्ग के बीच परीक्षण किए जा रहे हैं। नागपुर-गोंदिया के 135 किलोमीटर हिस्से में भी इसे लागू करने का लक्ष्य है। वहीं कलमना-सालवा के 25 किलोमीटर हिस्से में सुरक्षा मानकों के अनुरूप परीक्षण किया गया है।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के सीपीआरओ शेख समी उर रहमान के मुताबिक बिलासपुर-चांपा और दुर्ग-मांढर सेक्शन में मानक कवच चालू कर दिया गया है। शेष सेक्शन में कवच लगाने और एसआईएल-4 से संबंधित काम जारी है।