
*धन्वंतरि पूजन भारतीय चिकित्सा परंपरा एवं आयुर्वेद के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर*
*बिलासपुर।* भारतीय संस्कृति में धनतेरस का पर्व विशेष महत्व रखता है। सामान्यतः इसे धन और समृद्धि का पर्व माना जाता है, लेकिन इसका एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं स्वास्थ्यपरक पक्ष भी है। धनतेरस को भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद एवं आरोग्य का देवता माना गया है।
आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि जितपुरे ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना की जाती है। यह पर्व हमें स्वस्थ जीवन, दीर्घायु और निरोगी काया के महत्व का संदेश देता है।
डॉ. जितपुरे ने कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार की चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और रोगी के विकारों के शमन का विज्ञान है। आयुर्वेद में दिनचर्या, ऋतुचर्या, संतुलित आहार, योग, प्राणायाम, ध्यान, सद्वृत्त एवं प्राकृतिक जीवनशैली को विशेष महत्व दिया गया है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, तनाव, शारीरिक निष्क्रियता एवं मानसिक दबाव के कारण अनेक जीवनशैली जनित रोग बढ़ रहे हैं। ऐसे में आयुर्वेद के सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाना अत्यंत आवश्यक है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, पौष्टिक एवं संतुलित आहार तथा सकारात्मक विचार स्वस्थ जीवन के आधार हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भगवान धन्वंतरि का पूजन केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह अवसर हमें स्वास्थ्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने, औषधीय पौधों के संरक्षण, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रचार-प्रसार तथा स्वस्थ समाज के निर्माण का संकल्प लेने के लिए भी प्रेरित करता है।
*डॉ. रश्मि जितपुरे ने आमजन से अपील की कि इस धनतेरस पर सोने-चांदी एवं भौतिक समृद्धि के साथ-साथ स्वास्थ्य रूपी सबसे अनमोल धन को भी महत्व दें। क्योंकि वास्तविक समृद्धि वही है, जिसमें तन स्वस्थ, मन प्रसन्न और जीवन संतुलित हो।*
*संदेश: पहला सुख निरोगी काया – स्वस्थ शरीर ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है।*