छत्तीसगढ़ बंगाली समाज की बैठक में बनी आयोजन की रूपरेखा, मध्यरात्रि में होगी मां काली की विशेष पूजा; कीर्तन और भोग वितरण में शामिल होंगे श्रद्धालु

बिलासपुर। दीपावली की रात जहां उत्तर भारत में मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है, वहीं पश्चिम बंगाल और असम सहित पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में इस अमावस्या की रात मां काली की आराधना का विशेष महत्व है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बिलासपुर में निवासरत बंगाली समाज के लोग भी हर वर्ष दीपावली के अवसर पर श्रद्धा और उत्साह के साथ मां काली की पूजा करते हैं। इस वर्ष छत्तीसगढ़ बंगाली समाज की ओर से 8 से 10 नवंबर तक तोरवा स्थित बंगला भवन में मां काली की पूजा-अर्चना और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। आयोजन को लेकर समाज की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जिसमें कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करने के साथ ही पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं।

छत्तीसगढ़ बंगाली समाज के प्रदेश अध्यक्ष पल्लव धर ने बताया कि समाज की ओर से प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली मां काली की पूजा इस वर्ष भी पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। तीन दिवसीय आयोजन के दौरान मां काली की विधिवत पूजा-अर्चना, पुष्पांजलि, कीर्तन और भोग वितरण सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम होंगे। पूजा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

मध्यरात्रि में होगी मां काली की विशेष आराधना

आयोजन के तहत 8 नवंबर को मां काली की पूजा देर रात तक चलेगी। बंगाली परंपरा में दीपावली की अमावस्या की रात मां काली की आराधना का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी परंपरा के अनुरूप मध्यरात्रि में देवी की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालु मां के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना करेंगे। पूजा के पश्चात श्रद्धालुओं के बीच भोग का वितरण भी किया जाएगा।

9 नवंबर को पूजा के साथ कीर्तन का आयोजन

समाज की ओर से 9 नवंबर को भी मां काली की पूजा-अर्चना के साथ भक्ति संगीत और कीर्तन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। पारस संघ एवं हरि सभा के सहयोग से कीर्तन का आयोजन होगा। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ कीर्तन के माध्यम से भक्तिमय वातावरण निर्मित किया जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में समाज के लोगों की सक्रिय भागीदारी रहेगी।

बैठक में बनी आयोजन की रणनीति

कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में पूजा की व्यवस्था, धार्मिक कार्यक्रमों के संचालन, श्रद्धालुओं की सहभागिता और आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। पदाधिकारियों ने आपसी समन्वय के साथ सभी तैयारियां पूरी करने पर जोर दिया। बैठक में आयोजन की जिम्मेदारियों का बंटवारा भी किया गया, ताकि तीनों दिन कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हो सकें।

इस अवसर पर विधायक अमर अग्रवाल सहित अन्य विशिष्टजनों के शामिल होने की संभावना है। आयोजन के माध्यम से बिलासपुर में रह रहे बंगाली समाज के लोग अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ ही नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति से जोड़ने का प्रयास करेंगे।

बैठक में प्रदेश अध्यक्ष पल्लव धर, प्रदेश सचिव डॉ. एसके मजूमदार, प्रदेश संरक्षक आर्यन नाथ, महिला विंग की अध्यक्ष पूर्ति धर, महासचिव कल्पना दे, जिला महासचिव नारायण चंद्र दे, उपाध्यक्ष प्रणति बारिक, गोप दत्त, चंद्र चक्रवर्ती, गीता दत्त, उज्ज्वल बनर्जी, सरस्वती नाथ, सविता, ताप्ती, अनूप कुमार ताप्ती, एसके शर्मा, संजय चटर्जी, माधुरी राय, देवांशु विश्वास, अमन दत्त, भाग्य लक्ष्मी और प्रवीर भट्टाचार्य सहित समाज के अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।