15 अक्टूबर से शुरू होना था काम, संशोधित दरों के इंतजार में ठेकेदार; फिलहाल गड्ढे भरकर चलने लायक बनाई जाएंगी सड़कें

बिलासपुर। बरसात के बाद शहर की खराब सड़कों के डामरीकरण की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को अभी इंतजार करना पड़ेगा। डामर की कीमत 95 हजार रुपए प्रति टन पहुंचने से सड़कों का डामरीकरण अटक गया है। 15 अक्टूबर से शुरू होने वाला काम फिलहाल टाल दिया गया है। ठेकेदार राज्य शासन की ओर से डामर की संशोधित दरें जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने फिलहाल खराब सड़कों की मरम्मत कर गड्ढे भरने की तैयारी की है, ताकि त्योहारों के दौरान लोगों को आवाजाही में परेशानी न हो।

बरसात के बाद शहर और आसपास की सड़कों पर डामरीकरण कराया जाना था, लेकिन निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों ने योजना पर असर डाला है। वर्तमान में डामर का बाजार भाव 95 हजार रुपए प्रति टन है। ठेकेदारों का कहना है कि इस दर पर पुराने अनुबंध के अनुसार काम करना मुश्किल हो रहा है। संशोधित दरें जारी करने की मांग को लेकर ठेकेदारों ने अलग-अलग स्तरों पर ज्ञापन भी सौंपे हैं, लेकिन अब तक शासन की ओर से नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है।

डामर की कीमतों की समीक्षा हर 15 दिन में होती है। ऐसे में विभागीय अधिकारी भी संशोधित दरों का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, नवरात्र और आगामी त्योहारों के दौरान सड़कों पर बढ़ने वाली आवाजाही को देखते हुए पीडब्ल्यूडी ने फिलहाल अस्थायी मरम्मत का निर्णय लिया है। बुधवार को विभागीय अधिकारियों ने उन सड़कों का निरीक्षण किया, जहां गड्ढे भरने और उबड़-खाबड़ हिस्सों को समतल करने की जरूरत है। एक-दो दिन में मरम्मत का काम शुरू होने की संभावना है।

कोनी से सेंदरी के बीच सड़क की स्थिति खराब

बिलासपुर-रतनपुर फोरलेन के अधिकांश हिस्से में सड़क की स्थिति ठीक है, लेकिन कोनी से सेंदरी के बीच कुछ स्थानों पर सड़क खराब होने से राहगीरों और पैदल चलने वालों को परेशानी हो रही है। इसके अलावा सीपत-बलौदा मार्ग सहित अन्य खराब सड़कों का भी निरीक्षण किया गया है। फिलहाल इन मार्गों पर गड्ढे भरकर आवागमन सुगम बनाने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, अस्थायी मरम्मत से राहत मिलेगी, लेकिन स्थायी समाधान के लिए डामरीकरण जरूरी होगा।

तीन सड़कों के डामरीकरण के लिए 21 करोड़ का प्रस्ताव

शहर और आसपास के मार्गों को बेहतर बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने चतुर्दिक योजना के तहत तीन सड़कों के डामरीकरण के लिए शासन को 21 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा है। इसमें बिलासपुर-रतनपुर मार्ग का 8.4 किलोमीटर हिस्सा, पुराने बस स्टैंड से जुड़ा देहनकर मार्ग का 1.6 किलोमीटर हिस्सा और जेल पहुंच मार्ग का 400 मीटर हिस्सा शामिल है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर डामरीकरण कराया जाएगा।

20 गांवों की एक लाख आबादी को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी

बिलासपुर से खमतराई, बैमा, नगोई और पौसरा तक 14 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के लिए 37 करोड़ रुपए का अलग प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है। इस सड़क के बनने से करीब 20 गांवों की एक लाख आबादी को लाभ मिलने की उम्मीद है। बिलासपुर से इन गांवों की सीधी कनेक्टिविटी बेहतर होने के कारण जिला प्रशासन ने भी इस परियोजना को प्राथमिकता में रखा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

पांच साल से अधूरा ऑडिटोरियम, अब 10.50 करोड़ का प्रस्ताव

इंजीनियरिंग कॉलेज के अधूरे ऑडिटोरियम का निर्माण पूरा करने के लिए पीडब्ल्यूडी ने 10.50 करोड़ रुपए का पुनरीक्षित प्रस्ताव शासन को भेजा है। इससे पहले 8.50 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिल सकी। अब नए प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

ऑडिटोरियम का निर्माण करीब पांच साल से अधूरा पड़ा है। वर्ष 2018 में 7.63 करोड़ रुपए की लागत से इसका वर्क ऑर्डर जारी किया गया था। निर्माण कार्य वर्ष 2019 तक पूरा होना था और इसकी जिम्मेदारी संजीव कंस्ट्रक्शन को सौंपी गई थी। हालांकि, भुगतान संबंधी अड़चनों के कारण काम बीच में ही रुक गया और दोबारा शुरू नहीं हो सका।

पीडब्ल्यूडी बिलासपुर के चीफ इंजीनियर आरके रात्रे के अनुसार, शासन से मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इंजीनियरिंग कॉलेज के ऑडिटोरियम के पुनरीक्षित प्रस्ताव को जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।