
बिलासपुर। बिलासपुर बंगाली समाज द्वारा गुरुवार को आईएमए हॉल में आयोजित विजय सम्मिलनी समारोह हर्षोल्लास एवं सांस्कृतिक उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। शाम 7 बजे प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में समाज के सदस्यों, उनके परिवारजनों एवं कला-संस्कृति प्रेमियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक रवीन्द्र संगीत 'आकाश भरा सूर्य तारा' की मधुर प्रस्तुति से हुआ। इसके पश्चात समाज के अध्यक्ष ने अपने संबोधन में विजयादशमी के महत्व, सामाजिक एकता तथा बंगाली भाषा एवं संस्कृति की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डाला।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में नन्ही कलाकार आयुषी पालित एवं अरुणिमा पाल ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की। इसके बाद जयश्री भट्टाचार्य, रेखा दास, स्वस्तिका विश्वास, रीना चक्रवर्ती, सुपर्णा राय गुप्ता एवं मेघा चक्रवर्ती ने अपनी आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों से समारोह में चार चाँद लगा दिए।
संगीत संध्या में डॉ. सुदीप्त दत्त ने सैक्सोफोन वादन से विशेष समां बांधा। वहीं मौसमी चक्रवर्ती, श्राबणी दत्त, तुहिन चटर्जी, स्वागता चौधरी, प्रतिमा पाल, सौरभ चक्रवर्ती, शुभांशु शेखर घोष एवं शुक्ति विश्वास गोपा दासगुप्ता,रेखा दास,सीमा सेनगुप्ता,स्वस्तिका बिस्वास,देवाशीष नंदी,अपराजिता चौधरी, जयश्री भट्टाचार्य,ने अपनी सुमधुर गायन प्रस्तुतियों से पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया।
समारोह का एक विशेष आकर्षण 'अवॉर्ड' शीर्षक से प्रस्तुत नाट्य मंचन रहा। राजा दासगुप्ता के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक में शिवानी बोस, रिंकू गांगुली एवं राजा दासगुप्ता ने प्रभावशाली अभिनय किया। इस प्रस्तुति में अतनु घोष का विशेष सहयोग रहा। कलाकारों के सशक्त अभिनय और निर्देशक की कुशल प्रस्तुति ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया।
इसके अतिरिक्त डॉ. सोमनाथ मुखर्जी एवं अनुराधा मुखर्जी की हास्य प्रस्तुति ''सूक्ष्म विचार'' ने उपस्थित दर्शकों को खूब गुदगुदाया और समारोह में मनोरंजन का एक नया रंग जोड़ दिया।
पूरे कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन राजा दासगुप्ता ने किया। अंत में समाज के सचिव बिलास दास ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी कलाकारों, अतिथियों, सहयोगियों एवं उपस्थित सदस्यों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
इस आयोजन को सफल बनाने में कल्याण दत्ता,संगीत मैत्रा, अशोक बोस, दीपक मजूमदार, अपराजिता चौधरी, मणिका घोष, सीमा सेनगुप्ता एवं प्रतिमा पाल सहित समाज के अनेक सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा। डा हेमंत चटर्जी, तृप्ति चटर्जी,विभुरंजन घोष, सिद्धार्थ भट्टाचार्य,अनुपम सरकार, सरदिंदु गांगुली,कौशिक मित्रा सहित अनेक गण्यमान्य लोग उपस्थित थे।
समग्र रूप से यह विजय सम्मिलनी समारोह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन बनकर नहीं रहा, बल्कि सामाजिक एकजुटता, पारस्परिक सौहार्द एवं बंगाली कला-संस्कृति की समृद्ध विरासत के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का सुंदर उदाहरण बनकर उभरा।