छोटे कारोबारियों के आधार-पैन और संपत्ति के दस्तावेजों का किया दुरुपयोग, ईओडब्ल्यू-एसीबी ने दो आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में पेश किया चालान

बिलासपुर। कम ब्याज पर बैंक लोन दिलाने का झांसा देकर छोटे व्यापारियों और आम लोगों के दस्तावेज हासिल किए गए और उन्हीं के आधार पर 11 फर्जी फर्में बनाकर बैंक से 5 करोड़ 4 लाख 15 हजार रुपये का लोन स्वीकृत करा लिया गया। इस बड़े बैंकिंग घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) और एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने मास्टरमाइंड विश्वजीत भौमिक और बैंक ऑफ बड़ौदा की राजकिशोर नगर शाखा के तत्कालीन सीनियर ब्रांच मैनेजर राहुल कुमार सिन्हा के खिलाफ विशेष अदालत में चालान पेश किया है।

जांच के अनुसार, विश्वजीत भौमिक जरहाभाठा स्थित उड़ान माइक्रो फाइनेंस कार्यालय से छोटे लोन दिलाने और बैंक फाइनेंस का काम करता था। इस दौरान उसके पास लोन के लिए आने वाले लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, संपत्ति के मूल दस्तावेज और कोरे चेक पर हस्ताक्षर करा लिए जाते थे। बाद में इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर संबंधित लोगों की जानकारी के बिना उनके नाम पर फर्जी फर्में बना दी गईं।

कुछ फर्मों में विश्वजीत ने अपने कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों को प्रोपराइटर दर्शाया। यहां तक कि तीन फर्मों के गुमास्ता दस्तावेज भी कथित तौर पर कूटरचित तरीके से तैयार किए गए। इन फर्मों के नाम पर बैंक से अलग-अलग श्रेणियों में लोन लेने की प्रक्रिया शुरू की गई।

बिना भौतिक सत्यापन के स्वीकृत हुए करोड़ों के लोन

जांच में सामने आया कि 20 मार्च 2018 से 3 मई 2019 के बीच तत्कालीन सीनियर ब्रांच मैनेजर राहुल कुमार सिन्हा ने बैंकिंग नियमों की अनदेखी करते हुए इन फर्मों को कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी और टर्म लोन स्वीकृत किए। आरोप है कि लोन स्वीकृत करने से पहले फर्मों का भौतिक सत्यापन तक नहीं कराया गया।

इतना ही नहीं, लोन के बदले ऐसे लोगों की जमीनें गिरवी रख ली गईं, जिनका संबंधित फर्मों और कारोबार से कोई सीधा संबंध नहीं था। इस तरह दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से 11 फर्मों के नाम पर कुल 5 करोड़ 4 लाख 15 हजार रुपये का लोन हासिल किया गया।

ईओडब्ल्यू-एसीबी की जांच में बैंक मैनेजर की भूमिका भी आई सामने

मामले की जांच के बाद ईओडब्ल्यू और एसीबी ने विश्वजीत भौमिक को कथित तौर पर फर्जी फर्में तैयार कर लोन हासिल करने का मुख्य सूत्रधार माना है। वहीं तत्कालीन बैंक मैनेजर राहुल कुमार सिन्हा पर नियमों की अनदेखी कर लोन स्वीकृत करने और इस प्रक्रिया में सहयोग करने का आरोप है। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत विशेष अदालत में चालान पेश किया गया है। अब मामले में न्यायालयीन सुनवाई के दौरान आरोपों और प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच होगी।