
बिलासपुर। ऑपरेशन बाज के तहत बिल्हा पुलिस ने स्थायी वारंटियों की तलाश के लिए चलाए जा रहे अभियान में 2 वारंटियों को गिरफ्तार किया है। इनमें मारपीट के मामले में पिछले 2 साल से फरार एक आरोपी बाबा का भेष धारण कर दूसरे गांवों में घूम रहा था। पुलिस ने मतदाता परिचय पत्र में दर्ज फोटो से उसका मिलान कर पहचान की। वहीं, आबकारी मामले के एक अन्य स्थायी वारंटी को तिफरा से पकड़ा गया। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया है।
पुलिस के अनुसार, मारपीट के मामले में स्थायी वारंटी जगदीश बांधे (50), निवासी देवकिरारी, थाना बिल्हा, पिछले 2 साल से गिरफ्तारी से बचने के लिए बाबा का भेष धारण कर दूसरे गांवों में घूम रहा था। वह भिक्षा मांगकर जीवनयापन कर रहा था। वेशभूषा बदल लेने के कारण स्थानीय लोग भी उसे पहचान नहीं पा रहे थे। पुलिस उसकी पतासाजी के लिए गांव के सरपंच से मतदाता परिचय पत्र संबंधी जानकारी लेकर जांच कर रही थी।
17 अक्टूबर को जगदीश बांधे बिल्हा रेलवे स्टेशन पर बाबा के भेष में घूमता मिला। पुलिस ने उसके चेहरे का मिलान मतदाता परिचय पत्र में लगी तस्वीर से किया, जिसके बाद उसकी पहचान की पुष्टि हुई। इसके बाद उसे पकड़कर थाने लाया गया।
वहीं, आबकारी मामले में फरार स्थायी वारंटी मनोज टंडन (33), निवासी इंद्रपुरी तिफरा, थाना सिरगिट्टी को भी पुलिस ने तलाश कर गिरफ्तार किया। दोनों वारंटियों को न्यायालय में पेश किया गया।
पुलिस उपमहानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मधुलिका सिंह और नगर पुलिस अधीक्षक चकरभाठा राजेश जोशी के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में 6 स्थायी वारंट तामील किए जा चुके हैं। कार्रवाई में प्रशिक्षु उपनिरीक्षक आकाश कुमार बंजारे, निरीक्षक तोपसिंह नवरंग और आरक्षक प्रताप साहू की विशेष भूमिका रही।