पर्यावरण को नुकसान पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी—‘आखिरी पेड़ कटेगा, नदी जहरीली होगी, तब समझ आएगा कि पैसा खा नहीं सकते’; नगाई घाट में अवैध उत्खनन का मामला

बिलासपुर। अरपा नदी से अवैध रूप से रेत निकालने और चोरी करने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी कुंवर सिंह कंवर को 3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी ने 28 अक्टूबर को फैसला सुनाते हुए आरोपी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन और पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई। कोर्ट ने एक चर्चित कहावत का उल्लेख करते हुए चेताया कि जब आखिरी पेड़ कट जाएगा, नदी जहरीली हो जाएगी और आखिरी मछली भी पकड़ ली जाएगी, तब इंसान को समझ आएगा कि वह पैसा खा नहीं सकता।

मामला कोटा थाना क्षेत्र के अंतर्गत अरपा नदी के नगाई घाट में अवैध रेत उत्खनन और चोरी से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ वर्ष 2025 में कोटा थाने में मामला दर्ज किया गया था। प्रकरण की सुनवाई के बाद अदालत ने उसे भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2), छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के नियम 71 तथा खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धाराओं 4(1), 4(1क) और 21 के तहत दोषी ठहराया।

‘पैसा खा नहीं सकते’, प्रकृति के दोहन पर अदालत की चिंता

फैसले में अदालत ने पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। कोर्ट ने अमेरिका की आदिम जनजाति से जुड़ी एक प्रसिद्ध कहावत का हवाला दिया, जिसका संदेश है कि जब आखिरी पेड़ काट दिया जाएगा, आखिरी नदी जहरीली हो जाएगी और आखिरी मछली पकड़ ली जाएगी, तब इंसान को एहसास होगा कि पैसे को खाया नहीं जा सकता।

इस टिप्पणी के जरिए अदालत ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक संसाधनों का महत्व केवल उनके आर्थिक मूल्य तक सीमित नहीं है। नदियां, जंगल और जैव विविधता मानव जीवन के अस्तित्व के लिए जरूरी हैं। इनके विनाश का खामियाजा वर्तमान पीढ़ी के साथ आने वाली पीढ़ियों को भी भुगतना पड़ सकता है।

फैसले में पोप फ्रांसिस के उस विचार का भी उल्लेख किया गया, जिसमें जैव विविधता के विनाश को ईश्वर की रचना की अखंडता पर हमला बताया गया है। अदालत की टिप्पणी का व्यापक संदेश यही है कि प्राकृतिक संपदा को केवल कमाई का साधन समझकर उसका अंधाधुंध दोहन करना समाज और पर्यावरण, दोनों के लिए नुकसानदेह है।

अवैध उत्खनन पर सख्ती, 25 हजार रुपये से कम नहीं समझौता राशि

अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन के मामलों में आर्थिक दंड को लेकर भी सख्ती बढ़ाई गई है। पहले ऐसे मामलों में पकड़े जाने पर वाहन मालिकों से 8 से 10 हजार रुपये तक जुर्माना वसूले जाने की जानकारी सामने आती रही है। अब समझौता राशि न्यूनतम 25 हजार रुपये निर्धारित होने से अवैध उत्खनन और परिवहन में शामिल लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

हालांकि, समझौता राशि और अदालत द्वारा दोषसिद्धि के बाद लगाया जाने वाला जुर्माना अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं के तहत हो सकते हैं। इस मामले में आरोपी को अदालत ने 3 साल के कठोर कारावास के साथ 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

अरपा की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

बिलासपुर की जीवनरेखा मानी जाने वाली अरपा नदी में अवैध रेत उत्खनन का मामला नदी संरक्षण की चुनौती को सामने लाता है। रेत का अनियंत्रित दोहन नदी के प्राकृतिक स्वरूप, जल प्रवाह और आसपास के पर्यावरण को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में केवल कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि अवैध उत्खनन पर लगातार निगरानी रखना भी जरूरी है।

अदालत की सजा और पर्यावरण पर की गई टिप्पणी अवैध खनन में शामिल लोगों के लिए स्पष्ट संदेश है कि प्राकृतिक संसाधनों की चोरी को मामूली आर्थिक अपराध मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। नदी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण ही आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संपदा सुरक्षित रखने का रास्ता है।