
बिलासपुर केंद्रीय जेल में क्षमता से कहीं अधिक बंदियों के रहने और बंदियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। वर्तमान स्थिति में इस केंद्रीय जेल में महिला और पुरुष बंदी मिलाकर कुल 3,518 बंदी बंद हैं, जबकि जेल की कुल निर्धारित क्षमता मात्र 2,290 बंदियों की ही है। इस भीड़भाड़ और क्षमता के दबाव को कम करने के लिए प्रशासन द्वारा बड़ा कदम उठाया गया है, जिसके तहत बैमा नगोई में 1,500 क्षमता वाला एक नया और आधुनिक केंद्रीय जेल अलग से बनाया जा रहा है, जिसका निर्माण कार्य प्रगति पर है।
इस बीच, शासन और महानिदेशक (जेल) की विशेष पहल के परिणामस्वरुप बंदियों के जीवन में एक नई सुबह आई है। आज मुख्यालय से प्राप्त मेल के आधार पर, आजीवन कारावास की सजा काट रहे कुल 20 बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। इनमें से अधिकांश वे बंदी हैं जो 14 वर्ष या उससे अधिक की लंबी सजा सफलतापूर्वक काट चुके हैं। रिहा किए गए कुल 20 कैदियों में से 19 कैदियों को आज बिलासपुर केंद्रीय जेल से रिहा किया गया। इनमें से एक कैदी को पूर्व में बेहतर इलाज के लिए रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसे अब रायपुर से ही औपचारिक रूप से रिहा किया जाएगा।
जेल प्रशासन और शासन की इस मानवीय पहल का उद्देश्य लंबे समय से सजा काट रहे पात्र कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि जो बंदी अब जेल से रिहा होकर बाहर जा रहे हैं, वे अच्छे कर्मों और सकारात्मक भावनाओं को अपनाएंगे। वे अपने परिवार और समाज के बीच रहकर रीति-रिवाजों का पालन करते हुए आने वाले दिनों को शांति और सम्मान के साथ गुजार सकेंगे। उल्लेखनीय है कि बिलासपुर केंद्रीय जेल में कुल आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों की संख्या लगभग 1,100 से 1,200 के आसपास है, ऐसे में इस तरह के रिहाई आदेशों से अन्य बंदियों में भी सुधार की एक नई उम्मीद जागी है।