हत्या, दुर्घटना और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने की व्यवस्था, विसरा जांच के इंतजार में नहीं रुकेगी पुलिस की विवेचना
बिलासपुर। पोस्टमार्टम के बाद मिलने वाली शॉर्ट रिपोर्ट में चोटों और शरीर के अंदरूनी अंगों की जांच का पूरा विवरण नहीं होने से पुलिस की विवेचना प्रभावित होती थी। कई मामलों में विसरा या अन्य विशेष जांच की रिपोर्ट आने तक मौत के वास्तविक कारण पर डॉक्टरों की अंतिम राय लंबित रहती थी। अब इस व्यवस्था में बदलाव किया गया है। शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट देना बंद कर दिया गया है। सामान्य मामलों में सात दिन के भीतर पूरी रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि हत्या, दुर्घटना और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने की व्यवस्था लागू की गई है।
अब तक पोस्टमार्टम के बाद डॉक्टर प्रारंभिक यानी शॉर्ट रिपोर्ट जारी कर देते थे। इसमें मौत के संभावित कारण का उल्लेख तो होता था, लेकिन शरीर पर मिले चोटों के निशान, उनकी गहराई, अंदरूनी अंगों की स्थिति और चिकित्सकीय निष्कर्षों का विस्तृत विवरण कई बार उपलब्ध नहीं हो पाता था। विसरा या अन्य विशेष जांच के लिए नमूने भेजे जाने पर अंतिम राय महीनों तक लंबित रहती थी। इससे हत्या, आत्महत्या और दुर्घटना जैसे मामलों की जांच में पुलिस को परेशानी होती थी।
विसरा रिपोर्ट के इंतजार में नहीं रुकेगी जांच
नई व्यवस्था में विशेष जांच की रिपोर्ट लंबित होने के कारण पोस्टमार्टम के बाकी निष्कर्षों को रोककर नहीं रखा जाएगा। डॉक्टर उपलब्ध चिकित्सकीय तथ्यों के आधार पर पूरी रिपोर्ट तैयार करेंगे। यदि किसी मामले में विसरा या अन्य जांच जरूरी है तो उसका स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा और संबंधित रिपोर्ट मिलने के बाद अंतिम चिकित्सकीय राय दी जाएगी। इससे पुलिस को समय पर चोटों और अन्य परिस्थितियों से जुड़े तथ्य मिल सकेंगे। परिजनों को भी मौत की वास्तविक वजह जानने के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
पूरी रिपोर्ट में इन तथ्यों का रहेगा विवरण
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक की पहचान, परीक्षण की तारीख और समय के साथ शरीर पर मौजूद सभी बाहरी चोटों का स्थान, आकार और प्रकृति दर्ज होगी। सिर, छाती और शरीर के अन्य अंदरूनी हिस्सों की जांच के निष्कर्ष भी शामिल किए जाएंगे। फेफड़े, हृदय, लीवर सहित अन्य अंगों की स्थिति और चोटों का मृत्यु से संबंध भी स्पष्ट किया जाएगा। इसके अलावा विसरा और अन्य जांच के लिए भेजे गए नमूनों का विवरण तथा डॉक्टर की चिकित्सकीय राय रिपोर्ट का हिस्सा होगी।
मेडलेपार पोर्टल से ऑनलाइन तैयार होगी रिपोर्ट
पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने और पुलिस तक पहुंचाने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार के एनआईसी ने मेडलेपार पोर्टल विकसित किया है। इसके माध्यम से डॉक्टर ऑनलाइन पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर सकेंगे। पोर्टल पर रिपोर्ट की स्थिति, लंबित मामलों और रिपोर्ट जारी होने की प्रक्रिया की निगरानी भी की जा सकेगी।
सिम्स के फोरेंसिक विभाग के एचओडी डॉ. ज्ञानेंद्र उपाध्याय ने बताया कि शॉर्ट पीएम रिपोर्ट देना बंद कर दिया गया है। अब सात दिन के भीतर पूरी रिपोर्ट दी जा रही है। हत्या, दुर्घटना और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल के अनुसार हत्या, दुर्घटना और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में प्राथमिकता के आधार पर 24 घंटे के भीतर पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। वहीं, विस्तृत चिकित्सकीय परीक्षण और विशेष जांच की आवश्यकता वाले मामलों में सात दिन के भीतर पूरी रिपोर्ट देने का प्रावधान किया गया है।