राम के अयोध्या लौटने की खुशी में जलाए गए थे दीप, इस बार लक्ष्मी पूजन के साथ बुद्धि और समृद्धि की कामना का भी विशेष महत्व

बिलासपुर। रोशनी, उल्लास और खुशियों का पर्व दीपावली इस बार 8 नवंबर को मनाया जाएगा। अमावस्या तिथि दो दिन रहने के कारण दीपावली के बाद आने वाले पर्वों की तारीखों में बदलाव हुआ है। जहां कुछ मंदिरों में 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का आयोजन होगा, वहीं अधिकांश मंदिरों और घरों में 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा की जाएगी। भाईदूज 11 नवंबर को मनाई जाएगी। इस बार दीपावली पर स्वाति नक्षत्र, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग का संयोग भी बन रहा है।

दीपावली केवल दीप जलाने और आतिशबाजी का त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में यह अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर रावण का वध करने के बाद जब माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे, तब नगरवासियों ने उनके स्वागत में दीप जलाकर पूरी अयोध्या को रोशन कर दिया था। तभी से कार्तिक अमावस्या पर दीपोत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है। जैन धर्म में इसी दिन भगवान महावीर के निर्वाण दिवस का भी विशेष महत्व है। वहीं सिख परंपरा में बंदी छोड़ दिवस के रूप में यह पर्व मनाया जाता है।

इस वर्ष अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। धर्मशास्त्रीय मान्यता के अनुसार दीपावली का मुख्य पूजन प्रदोष काल और महानिशीथ काल में अमावस्या तिथि के दौरान किया जाता है। इसलिए 8 नवंबर की शाम अमावस्या रहने के कारण इसी दिन दीपावली मनाई जाएगी। अगले दिन सोमवार को सोमवती अमावस्या होने से स्नान और दान का विशेष महत्व रहेगा।

दीपावली की रात मां महालक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और कुबेर की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी धन, वैभव और समृद्धि प्रदान करती हैं, जबकि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और विघ्नों से मुक्ति के देवता हैं। धन के साथ सही निर्णय लेने की क्षमता और विवेक भी जरूरी है। इसी कारण लक्ष्मी के साथ गणेश पूजन की परंपरा है। कुबेर की पूजा धन की स्थिरता और वृद्धि के लिए की जाती है। कई घरों में मां सरस्वती, नवग्रह और पंचदेवों का पूजन भी होता है।

दो दिन अमावस्या से गोवर्धन पूजा की तारीख में अंतर

अमावस्या तिथि दो दिन होने के कारण इस बार गोवर्धन पूजा और अन्नकूट के आयोजन अलग-अलग तारीखों पर होंगे। व्यंकटेश मंदिर में 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा की जाएगी। सुबह गौवंश को स्नान कराकर उनका श्रृंगार और पूजन होगा। इसके बाद गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत, नदियों, पहाड़ों और भगवान श्रीकृष्ण के ग्वाल-बाल सखाओं की आकृतियां बनाई जाएंगी। सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक भजन-कीर्तन होगा। दोपहर 12 बजे मुख्य आरती के बाद स्तोत्र पाठ और तुलसी अर्चना की जाएगी।

अन्नकूट की परंपरा के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान को जिन हरी सब्जियों का भोग लगाना बंद कर दिया जाता है, उन्हें इस दिन दोबारा अर्पित किया जाता है। इनमें लाल भाजी, पालक, मेथी, बैंगन और मूली प्रमुख हैं। इनसे विशेष पकवान तैयार कर भगवान को भोग लगाया जाएगा और बाद में महाप्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।

घोंघा बाबा मंदिर में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का आयोजन 10 नवंबर को होगा। मंदिर परिवार की ओर से एक हजार से अधिक श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा हरदेव लाल मंदिर, पीतांबरा पीठ, लक्ष्मी-नारायण मंदिर सदर बाजार, काली मंदिर तिफरा और मरीमाई मंदिर रेलवे में भी 10 नवंबर को अन्नकूट का आयोजन होगा।

मिट्टी के दीपक में पंचतत्वों का प्रतीक

पीतांबरा पीठ के पीठाधीश्वर आचार्य दिनेश महाराज के अनुसार दीपावली पर पारंपरिक मिट्टी के दीपक जलाने का विशेष महत्व है। मिट्टी का दीपक पृथ्वी, जल, आकाश, वायु और अग्नि पांचों तत्वों का प्रतीक माना जाता है। दीपक की लौ अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मिट्टी के दीपक जलाने से घर में सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और शांति का वातावरण बनता है।

स्वाति नक्षत्र और तुला राशि में सूर्य-चंद्रमा का संयोग

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार दीपावली स्वाति नक्षत्र, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग के संयोग में मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों तुला राशि में गोचर करेंगे। पंचांगीय गणना के अनुसार 8 नवंबर की शाम प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने से इसी दिन दीपदान और महालक्ष्मी पूजन शास्त्रसम्मत रहेगा। तिथियों के इस बदलाव के कारण दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा और भाईदूज के आयोजन भी सामान्य क्रम से एक दिन आगे बढ़ गए हैं।