सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर मौका निरीक्षण के बाद बंद कर दी गई थी फाइल, 38 दिन में करंट से दूसरी मौत

रतनपुर। बिजली विभाग की कागजी जांच और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। रतनपुर के वार्ड क्रमांक 8 में जिस बिजली लाइन को विभाग ने महज 11 दिन पहले निरीक्षण के बाद सुरक्षित और पर्याप्त ऊंचाई पर बताया था, उसी लाइन का तार शुक्रवार शाम टूटकर जमीन पर गिर गया। इसकी चपेट में आने से साइकिल से घर लौट रहे 47 वर्षीय किसान ईश्वर अनंत की करंट लगने से मौत हो गई।

घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश है। खास बात यह है कि हादसे वाली जगह से करीब 200 मीटर की दूरी पर 38 दिन पहले भी करंट की चपेट में आने से पुत्री लाल नामक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद बिजली के जर्जर और लटकते तारों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।

3 अगस्त को की थी शिकायत, रिपोर्ट में तार को बताया सुरक्षित

स्थानीय लोगों के मुताबिक सब्जी मंडी क्षेत्र में बिजली के जर्जर और लटकते तारों की समस्या पिछले 12 वर्षों से बनी हुई है। करीब एक माह पहले हुई करंट से मौत के बाद मोहल्लेवासियों ने 3 अगस्त को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत के बाद बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ने मौके का निरीक्षण किया। बताया जा रहा है कि विभाग की रिपोर्ट में लाइन को सुरक्षित बताते हुए तार की जमीन से ऊंचाई पर्याप्त होने का उल्लेख किया गया। इसी रिपोर्ट के आधार पर सीएम हेल्पलाइन की शिकायत का निराकरण कर फाइल बंद कर दी गई।

लेकिन विभागीय रिपोर्ट के महज 11 दिन बाद उसी लाइन का तार टूटकर जमीन पर गिर गया। शुक्रवार शाम हुए हादसे ने विभागीय निरीक्षण और शिकायत के निराकरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मंदिर से लौट रहे थे किसान

संगम चौक, भेड़ीमुड़ा निवासी ईश्वर अनंत पिता जग्गू शुक्रवार शाम आठाबीसा तालाब परिसर स्थित शिव मंदिर में पूजा करने गए थे। पूजा के बाद वे साइकिल से घर लौट रहे थे। इसी दौरान श्रद्धांजलि भवन के सामने से गुजरते समय लो-पावर ट्रांसमिशन लाइन का तार अचानक टूटकर उनके ऊपर जा गिरा।

तार में करंट प्रवाहित होने के कारण ईश्वर अनंत उसकी चपेट में आ गए। उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।

38 दिन में दूसरी मौत, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था

स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी क्षेत्र में करीब 38 दिन पहले भी बिजली के तार की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हुई थी। उस घटना के बाद लोगों ने बिजली के जर्जर तारों और उनकी ऊंचाई को लेकर शिकायत की थी। इसके बावजूद विभाग की ओर से समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।

अब दूसरी मौत के बाद लोगों में बिजली विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ गई है। लोगों का आरोप है कि यदि शिकायत के बाद विभाग ने वास्तविक स्थिति की जांच कर तारों की मरम्मत अथवा उन्हें सुरक्षित ऊंचाई पर किया होता तो संभवत: यह हादसा टाला जा सकता था।

सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत के महज 11 दिन बाद उसी लाइन के टूटने से हुई मौत ने विभाग की जांच रिपोर्ट और कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और क्षेत्र की सभी जर्जर बिजली लाइनों का तत्काल निरीक्षण कराने की मांग कर रहे हैं।