रिटायर्ड एसईसीएल कर्मी से 99 हजार, बुजुर्ग के खाते से 11.29 लाख पार; सिम्स के डेंटल सर्जन को 6.88 लाख का चूना, तीनों मामलों में पुलिस जांच

बिलासपुर। सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक विज्ञापन, पेंशन कार्ड का लालच और ऑनलाइन ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का झांसा बिलासपुर में तीन लोगों को भारी पड़ गया। साइबर ठगों ने अलग-अलग तरीकों से एक रिटायर्ड एसईसीएल कर्मी, 70 वर्षीय बुजुर्ग और सिम्स में पदस्थ डेंटल सर्जन को निशाना बनाकर कुल 19 लाख 17 हजार 510 रुपये की ठगी कर ली। कहीं सस्ते ड्राईफ्रूट्स के ऑर्डर के बाद रिफंड के नाम पर खाते से रकम निकाली गई, तो कहीं बैंक के लोगो वाले फर्जी विज्ञापन के जरिए गोपनीय जानकारी हासिल की गई। तीसरे मामले में ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर लाखों रुपये का मुनाफा दिखाकर निवेश के नाम पर रकम जमा कराई गई। शिकायतों के आधार पर पुलिस ने मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

रिफंड के नाम पर तीन बार कोड डलवाकर 99,600 रुपये उड़ाए

सरकंडा क्षेत्र के राजकिशोर नगर स्थित जॉब इन्क्लेव निवासी इतवारी लाल चंद्रा एसईसीएल से सेवानिवृत्त हैं। 6 अक्टूबर की रात उनकी पत्नी ने सोशल मीडिया पर सस्ते दाम में ड्राईफ्रूट्स बेचने का विज्ञापन देखा। विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने के बाद अज्ञात व्यक्ति ने भुगतान के लिए क्यूआर कोड भेजा। इसके जरिए इतवारी लाल ने यूपीआई से 2400 रुपये ट्रांसफर कर दिए।

दो दिन बाद 8 अक्टूबर की रात फोन करने वाले व्यक्ति ने कथित तौर पर ऑनलाइन हड़ताल का हवाला देते हुए सामान भेजने में असमर्थता जताई और रकम वापस करने की बात कही। रिफंड की प्रक्रिया समझाने के नाम पर आरोपी ने उनसे कोड के आगे राशि दर्ज कराई। पीड़ित के अनुसार, पहली बार कोड 2 के आगे रकम दर्ज करने पर खाते से 22,400 रुपये कट गए।

शिकायत करने पर आरोपी ने रकम वापस दिलाने और दोगुना भुगतान करने का भरोसा दिया। इसके बाद कोड 4 और 3 दर्ज कराने पर क्रमशः 42,400 और 32,400 रुपये और कट गए। इस तरह तीन बार में कुल 99,600 रुपये की चपत लग गई। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

पेंशन कार्ड के फर्जी विज्ञापन से बुजुर्ग के 11.29 लाख पार

दूसरे मामले में उसलापुर के अलका एवेन्यू निवासी 70 वर्षीय पवन चक्रवर्ती को सीनियर सिटीजन पेंशन कार्ड जारी करने का झांसा देकर 11 लाख 29 हजार रुपये ठग लिए गए। पीड़ित के मुताबिक, 11 अक्टूबर को उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर आईसीआईसीआई बैंक के लोगो वाला पेंशन कार्ड का विज्ञापन दिखाई दिया। उन्होंने लिंक पर क्लिक किया तो कुछ देर बाद एक अज्ञात मोबाइल नंबर से फोन आया।

कॉलर ने खुद को बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि बताते हुए पेंशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया समझाई। इसी दौरान पैन कार्ड नंबर और एटीएम कार्ड से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल कर ली। विज्ञापन और कॉलर की बातों पर भरोसा कर बुजुर्ग ने जानकारी साझा कर दी। इसके बाद आरोपी ने 11 अक्टूबर को ही उनके आईसीआईसीआई बैंक के बचत खाते से लगातार 9 ट्रांजेक्शन कर कुल 11 लाख 29 हजार रुपये निकाल लिए।

खाते से बड़ी रकम निकलने के बाद पीड़ित को ठगी का पता चला। उन्होंने सिविल लाइन थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात कॉलर के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर मोबाइल नंबर और बैंक खातों के आधार पर जांच शुरू कर दी है।

स्क्रीन पर 14 लाख का मुनाफा, रकम निकालने गए तो 6.88 लाख डूबे

तीसरे मामले में सिम्स में पदस्थ डेंटल सर्जन डॉ. प्रकाश खरे को ऑनलाइन कॉपी ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच देकर 6 लाख 88 हजार 910 रुपये ठग लिए गए। मूल रूप से बेमेतरा जिले के साजा निवासी डॉ. खरे वर्तमान में सिम्स के एसआर हॉस्टल में रहते हैं। एक परिचित डॉक्टर के माध्यम से उन्हें कॉपी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की जानकारी मिली थी।

इसके बाद 29 सितंबर को उनके व्हाट्सएप पर एक अज्ञात नंबर से संदेश आया। तनीषा वर्मा नाम की युवती ने उनका रजिस्ट्रेशन कराकर मेटाट्रेडर-5 प्लेटफॉर्म पर आईडी लिंक कराई। शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने 30 सितंबर को 10 हजार रुपये यूपीआई के जरिए जमा कराए। बाद में कार्तिक नाम के व्यक्ति ने ट्रेडिंग में अधिक मुनाफा होने का दावा करते हुए लगातार निवेश बढ़ाने के लिए कहा।

आरोप है कि 12 अक्टूबर तक मोहम्मद निसार, नितेश कुमार, सरवेश कुमार और नरेश चौधरी के नाम से जुड़े बैंक खातों और यूपीआई के माध्यम से 13 बार में कुल 6 लाख 88 हजार 910 रुपये जमा कराए गए। ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर की स्क्रीन पर करीब 14 लाख रुपये का मुनाफा दिखाई देने लगा। इसे वास्तविक कमाई समझकर डॉ. खरे ने 3 लाख रुपये निकालने की रिक्वेस्ट डाली, लेकिन निकासी रोक दी गई। इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। साइबर पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर जांच शुरू की है।

सस्ते ऑफर, फर्जी पेंशन कार्ड और मुनाफे के दावों से रहें सावधान

तीनों मामलों में ठगी के तरीके अलग-अलग हैं, लेकिन आरोपियों ने लोगों का भरोसा जीतने और उन्हें जल्द निर्णय लेने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की। सस्ते सामान के नाम पर भुगतान कराने के बाद रिफंड का झांसा दिया गया, बैंक के लोगो वाले विज्ञापन से बुजुर्ग की गोपनीय जानकारी हासिल की गई और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर काल्पनिक मुनाफा दिखाकर बार-बार निवेश कराया गया।

साइबर सुरक्षा के लिहाज से अनजान वेबसाइटों पर दिखने वाले आकर्षक ऑफर की सत्यता जांचना जरूरी है। पेंशन कार्ड या केवाईसी के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति को बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी न दें। अनजान व्यक्ति से मिले क्यूआर कोड को बिना जांचे इस्तेमाल न करें। यूपीआई से रकम प्राप्त करने के लिए सामान्यतः यूपीआई पिन दर्ज करने की जरूरत नहीं होती; पिन डालने से भुगतान अधिकृत हो सकता है।

ऑनलाइन ठगी होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही अपने बैंक को तुरंत सूचना देकर संदिग्ध लेनदेन रोकने और खाते में उपलब्ध रकम सुरक्षित कराने का प्रयास करें।