सुशासन तिहार, जनदर्शन और सीएम हेल्पलाइन में बढ़ती शिकायतों के बाद कवायद तेज, तहसील मुख्यालय से 50-60 किमी दूर हल्का होने पर पटवारी संघ ने जताई व्यावहारिक दिक्कत
बिलासपुर। सुशासन तिहार, कलेक्टर जनदर्शन और सीएम हेल्पलाइन में राजस्व मामलों की पेंडेंसी तथा हल्का कार्यालयों में पटवारियों के नहीं मिलने की शिकायतों को देखते हुए अब पटवारियों की उपस्थिति व्यवस्था में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पटवारियों को सुबह और शाम अपने मुख्यालय से ई-अटेंडेंस लगानी पड़ सकती है। तहसील स्तर पर इसकी जानकारी पहुंच चुकी है, हालांकि शासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
पटवारियों के हल्का कार्यालय में उपलब्ध नहीं रहने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। नामांतरण, सीमांकन, पटवारी प्रतिवेदन और अन्य राजस्व कार्यों के लिए ग्रामीणों को हल्का कार्यालय पहुंचना पड़ता है। कई बार पटवारी के नहीं मिलने से लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। छोटे-छोटे राजस्व कार्यों में भी लंबा समय लगने की शिकायतें जनदर्शन और सीएम हेल्पलाइन तक पहुंच रही हैं। काम के बदले अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आने के बाद प्रशासन अब व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने की तैयारी में है।
पहले भी दिए जा चुके हैं हल्का कार्यालय में रहने के निर्देश
पटवारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जिले में पहले भी उन्हें हल्का कार्यालय में उपलब्ध रहने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद शिकायतों में पूरी तरह कमी नहीं आई। जनदर्शन में पहुंचने वाली शिकायतों में पटवारी के काम नहीं करने, समय पर प्रतिवेदन नहीं देने और लोगों को बार-बार कार्यालय बुलाने जैसी शिकायतें शामिल रहती हैं। ऐसे में अब ई-अटेंडेंस के माध्यम से उनकी उपस्थिति की निगरानी करने की कवायद की जा रही है।
पटवारी संघ ने बताई फील्ड की व्यावहारिक दिक्कतें
नई व्यवस्था की सुगबुगाहट के बाद छत्तीसगढ़ पटवारी संघ ने भी आपत्ति जताई है। संघ के प्रतिनिधियों ने राजस्व मंत्री से मुलाकात कर पटवारियों के मैदानी काम की प्रकृति और अटेंडेंस को लेकर आने वाली दिक्कतों से अवगत कराया है।
संघ का तर्क है कि पटवारियों को पेशी, सीमांकन और मौका-मुआयना जैसे कार्यों के लिए कई बार सुबह से शाम तक फील्ड में रहना पड़ता है। ऐसी स्थिति में निर्धारित समय पर दो बार अटेंडेंस लगाना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो सकता है। संघ के मुताबिक कई पटवारियों का हल्का तहसील मुख्यालय से 50 से 60 किलोमीटर तक दूर है। ऐसे में यदि तहसील मुख्यालय से अटेंडेंस अनिवार्य की जाती है तो रोजाना आने-जाने में समय और संसाधन दोनों खर्च होंगे।
संघ ने यह भी तर्क दिया है कि कुछ अन्य मैदानी कर्मचारियों, जैसे पीएचई, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और व्यायाम शिक्षकों को अटेंडेंस व्यवस्था में छूट दी गई है। वहीं यदि हल्का कार्यालय को ही पटवारी का मुख्यालय मानकर अटेंडेंस लगाई जाती है, तो फील्ड में होने वाले कार्यों के कारण दिनभर कार्यालय में मौजूद रहना संभव नहीं होगा।
फिलहाल औपचारिक आदेश का इंतजार
बिलासपुर एसडीएम मनीष साहू ने बताया कि मुख्यालय से अटेंडेंस लगाने की व्यवस्था की जानकारी है, लेकिन शासन की ओर से अभी कोई औपचारिक निर्देश जारी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जहां तक मुख्यालय से अटेंडेंस लगाने की बात है, पटवारी अपने कार्यालय से अटेंडेंस लगा सकते हैं।
नई व्यवस्था लागू होने की स्थिति में प्रशासन का उद्देश्य जहां पटवारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, वहीं पटवारियों के फील्ड कार्य और दूरस्थ हल्कों की व्यावहारिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चुनौती होगी।