औरापानी डैम में संदिग्ध परिस्थिति में मिली ऋषभ देव की मौत से जुड़े अहम सुराग थे मोबाइल में, परिजनों ने पुलिस पर केस कमजोर करने का लगाया आरोप
बिलासपुर। कोटा थाना क्षेत्र में औरापानी डैम में संदिग्ध परिस्थिति में मृत मिले ऋषभ देव सिंह की मौत के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। मृतक का मोबाइल, जिसमें मौत से पहले की कॉल रिकॉर्डिंग सहित कई अहम इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य होने की बात परिजनों ने कही थी, फोरेंसिक जांच के लिए भेजने के बजाय थाने के मुंशी ने अपने ड्राइवर को दे दिया। आरोप है कि ड्राइवर ने करीब 2 महीने तक मोबाइल का इस्तेमाल किया और उसमें मौजूद डेटा भी डिलीट कर दिया। मामला सामने आने के बाद परिजन पुलिस पर जानबूझकर केस कमजोर करने और आरोपियों को बचाने का आरोप लगा रहे हैं।
सरकंडा के बंगाली पारा गली नंबर 4 निवासी ओमप्रकाश सिंह के इकलौते बेटे ऋषभ देव सिंह (32) को 12 जुलाई की रात उसके दोस्तों ने बुलाया था। वह उनके साथ घर से निकला था। अगले दिन 13 जुलाई को उसकी लाश औरापानी डैम में संदिग्ध परिस्थिति में मिली। परिजनों के मुताबिक ऋषभ के सीधे हाथ में चश्मा था और दूसरे हाथ की कलाई पर घड़ी बंधी हुई थी। शरीर पर डूबने से पहले खुद को बचाने की कोशिश के स्पष्ट निशान भी नहीं थे। इसी वजह से परिजनों ने शुरुआत से ही हत्या की आशंका जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
मोबाइल में थीं मौत से पहले की कॉल रिकॉर्डिंग
परिजनों का कहना था कि ऋषभ के मोबाइल में उसकी मौत से पहले हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग सहित अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मौजूद थे। उन्होंने मोबाइल की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की थी। 22 जुलाई को SDOP नुपूर उपाध्याय ने मृतक की बहन ऋषिका सिंह को ASP कार्यालय बुलाया था। ऋषिका ने मोबाइल SDOP को सौंपा। SDOP ने कार्यालय में मौजूद तत्कालीन कोटा थाना प्रभारी प्रशिक्षु DSP आकाश चौधरी को मोबाइल दिया। इसके बाद उन्होंने मोबाइल थाने के मुंशी को सौंपते हुए संबंधित जांच अधिकारी के माध्यम से फोरेंसिक जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए थे।
इसी दिन शाम को आकाश चौधरी का तबादला सिरगिट्टी थाने हो गया। इसके बाद मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने की बजाय कहां रहा, इसकी जानकारी परिजनों को नहीं दी गई। ऋषिका सिंह के मुताबिक, करीब 2 महीने तक परिवार मोबाइल वापस लेने के लिए पुलिस से संपर्क करता रहा, लेकिन हर बार अलग-अलग कारण बताकर उन्हें टाल दिया गया।
परिजनों ने कॉल किया तो ड्राइवर ने उठाया फोन
12 सितंबर को परिजनों ने ऋषभ के मोबाइल नंबर पर फोन किया तो फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को थाने से जुड़ा बताया। इसके बाद परिजन कोटा थाना पहुंचे। वहां मुंशी ने ड्राइवर सूरज देवांगन को बुलाकर मृतक का मोबाइल वापस कराया। ऋषिका सिंह का आरोप है कि करीब 2 महीने बाद मोबाइल वापस मिला तो उसमें मौत से जुड़े कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य डेटा मौजूद नहीं थे। उनका कहना है कि मोबाइल को इस दौरान इस्तेमाल किया गया और उसके महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य डिलीट कर दिए गए।
आज IG और SSP से शिकायत करेंगे परिजन
परिजनों ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की मांग की है। ऋषिका सिंह का कहना है कि मोबाइल में ऋषभ की मौत से जुड़े अहम सुराग थे। मोबाइल को फोरेंसिक जांच के लिए भेजने के बजाय निजी इस्तेमाल में दिया जाना और बाद में डेटा का डिलीट मिलना सामान्य लापरवाही नहीं हो सकती। वे IG और SSP से शिकायत कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और डिलीट किए गए डेटा की फोरेंसिक रिकवरी कराने की मांग करेंगी।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
इस मामले में ASP ग्रामीण मधुलिका सिंह ने कहा कि कोटा थाने के संदिग्ध मौत के मामले में फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजने के बजाय निजी ड्राइवर को इस्तेमाल के लिए दिए जाने की बात सामने आई है। मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।